हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जिस प्रकार से पूरे देश में मोदी सरकार के खिलाफ आम जनता विरोध में है। छात्र नौजवान दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के हर शहर में आंदोलन कर रहे है। यह बताता है कि सरकार जनता के विश्वास खो चुकी है। प्रधानमंत्री अपनी विफलता स्वीकार करें तथा तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। किसी प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ देश के युवाओं में ऐसा आक्रोश पहली बार देखने को मिल रहा है।

सरकार लोगों को डंडे के जोर पर विस्थापित कर रही…
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राजधानी रायपुर के नकटी से लेकर सरगुजा, बस्तर सभी जगह आम आदमी को बेदखल करने की कार्यवाही सरकार के द्वारा की जा रही है। सूरजपुर में कोयला खदान के लिए ग्रामीणों को विस्थापित करने पुलिस के द्वारा बल प्रयोग किया गया वहां अप्रिय स्थिति निर्मित हुई। सूरजपुर, हसदेव, तमनार, छुईखदान बस्तर में आदिवासियों एवं आम लोगों की जल, जंगल, जमीन पर कब्जा करने दमनकारी कार्यवाही लगातार हो रही है। सूरजपुर जिला में जनता, भूमि अधिग्रहण में जमीन के बदले जमीन मांग रही है लेकिन सरकार उनका जमीन छीनकर पूंजीपतियो को देना चाहती है, बदले में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को जमीन नहीं देना चाहती है। ये जनता के साथ अन्याय है।सरकार किसी को विस्थापित करना चाहती है तो वहां के प्रभावितों को विश्वास में ले तथा उनका विस्थापन करे। डंडे के जोर पर विस्थापन अस्वीकार्य है।
छत्तीसगढ़ में यूसीसी आदिवासियों के हितों, अधिकारों पर डाका डालने की कोशिश…
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू होता तो सबसे बड़ा नुकसान छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को होगा। यूसीसी छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के खिलाफ है, राज्य में केवल आदिवासी ही ऐसे है जिन्हें प्रदेश में निवासरत अन्य लोगों की अपेक्षा विशेष संवैधानिक संरक्षण मिला हुआ है। इसके अलावा कोई भी वर्ग छत्तीसगढ़ में नहीं है जिसके लिए विशेष नागरिक प्रावधान लागू है। छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासियों की है, संरक्षित जनजातियां है, जिन्हें संविधान में कुछ विशेष अधिकार मिले है। उनकी रक्षा के लिए पेसा कानून लागू है और 5 अनुसूची लागू है और भाजपा यूसीसी लाकर आदिवासियों के हितों में डकैती डालने की कोशिश में है। बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा हुई है उसके बाद से ही भाजपा के समर्थित उद्योगपति बस्तर में आदिवासियों की जमीन पर नजरे गड़ाये हुए है। बस्तर में भाजपा के समर्थित उद्योगपतियों की नजर लग चुकी है और वह आदिवासियों की जमीन हड़पना चाहते है। यूसीसी लाने की कवायद इसीलिए है। राज्य के आदिवासियों के हितों को दरकिनार करके उद्योगपतियों के हितों को बढ़ावा देने की कोशिश है। आदिवासियों की जमीनें कानून दूसरा कोई ले नहीं सकता, इसलिए तमाम तरीके के रास्ते खोजने की शुरूआत की जा रही है।

सरकार बताये किः-
ऽ क्या यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में पेसा कानून का अस्तित्व यथावत रहेगा?
ऽ पांचवी अनुसूची की पंचायतों के अधिकारों में कोई छोड़छाड़ नहीं होगी?
ऽ राज्य की संरक्षित जनजातियां बैगा, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया, पांडा को संविधान में विशेष संरक्षण मिला है क्या यूसीसी लागू होने पर इनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे?
ऽ आदिवासियों की जमीनों पर उनके सामुदायिक अधिकारों का हनन नहीं किया जायेगा?



