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विश्व प्रसिद्ध हीरा खदान पायलीखण्ड, बेहराडीह की सुरक्षा में एक चौकीदार तक नही है तैनात…

विश्व प्रसिद्ध हीरा खदान पायलीखण्ड, बेहराडीह की सुरक्षा में एक चौकीदार तक नही है तैनात…

सरकारी उत्खनन से मैनपुर गरियाबदं जिले और प्रदेश का होगा विकास।

 राज्य निर्माण के 26 वर्षाे बाद भी हीरा खदान मामले पर नही हो पाया कोई ठोस पहल, मामला कोर्ट के अधीन।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे इसलिए सुरक्षा व्यवस्था हटा ली गई थी पहले पुलिस के फोर्स थे तैनात।

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हरियर एक्सप्रेस, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ प्रदेश के गरियाबंद जिला अंतर्गत विकासखंड मैनपुर के पायलीखंड एवं बेहराडीह के हीरा (डायमंड) खदानो का पता प्रशासन को लगभग 37-38 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य के जमाने मे लगा था तब से लेकर आज तक इलाके मे हीरा तस्करी का लम्बे समय से व्यापार का सिलसिला जारी रहा है और अभी भी लगातार हीरा तस्करी के मामले सामने आते रहते है, जब हीरा खदान का पता चला तब हीरा खदानो के मामले को संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालिन मुख्यमंत्री दिग्वीजय सिंह के निर्देश पर पायलीखण्ड एवं बेहराडीह जंगल पर हीरा मिलने वाले एक निश्चित बड़े हिस्से को तार के बाड़ो से घेर कर सुरक्षित किए किया गया था पायलीखंड के हीरा खदानो की सुरक्षा के लिए बी.एस.एफ की कंपनी तैनात किया गया था और खनिज विभाग ने बकायदा चौकीदार नियुक्त किया था मगर इसकी सुरक्षा पिछले कुछ वर्षाे से भगवान भरोसे है, मिली जानकारी के अनुसार यह पुरा ईलाका घोर नक्सली प्रभावित रहा है क्षेत्र में वर्ष 2006-07 मे नक्सलियो के दबाव बढने के बीच जहां पायलीखंड हीरा खदान से बी.एस.एफ. कंपनियो को खदान की सुरक्षा से वापिस बुला लिया गया तो वही बेहराडीह हीरा खदान की सुरक्षा से वन विभाग ने हाथ खड़ा कर दिया तब से लेकर आज तक हीरा खदान की सुरक्षा पूरी तरह से भगवान के भरोसे है यहां उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्र सीमावर्ती राजस्थान राज्य के व्यापारियो द्वारा आकर इस क्षेत्र से हीरा तस्करी कर ले जाने की खबर समय -समय पर आती रहती है और इसकी पुष्टि स्वयं विभाग कर रही है पिछले 16-17 वर्षाे में गरियाबंद जिले के पुलिस ने क्षेत्र से हीरा की अवैध तस्करी के सैकड़ो मामले दर्ज किये है करोड़ो की हीरा के साथ तस्करो को पकड़ने में पुलिस ने सफलता प्राप्त किया है।

हीरा खदान से सुरक्षा हटने के बाद से लगातार अवैध उत्खनन के चलते चारो तरफ सिर्फ गड्ढे ही गड्ढे

बताया जाता है तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 42 किमी दूर विश्व के प्रसिध्द हीरा खदान पायलीखण्ड एवं मैनपुर से 8 किमी दूर बेहराडीह हीरा खदान का मामला न्यायालय मे होने के कारण छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25-26 वर्षाे बाद भी सरकारी दोहन शुरू नही हो पाया है समय समय पर इन हीरा खदानो मे अवैध खुदाई की खबर निकलकर सामने आती है खासकर बारिश के दिनो मे इन दोनो हीरा खदानो मे नदी नालो मे बाढ का फायदा उठाकर ओड़िसा महाराष्ट्र और राजस्थान के तस्करो द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन को अंजाम दिया जाता है जिसका प्रमाण हीरा खदान क्षेत्र मे देखा जा सकता है हीरा खदान क्षेत्रो में तस्करों के द्वारा पूर्व में इस बेदर्दी के साथ अवैध खुदाई किया गया है कि जगह जगह 10 से 20 फीट गहरे कुएं जैसे सैकड़ो गड्डे हो गये है और तो और हीरा खदान की सुरक्षा के लिए निर्माण किये गये वर्षाे पूर्व चौकीयों को भी हीरा के तलबगारो ने चारो तरफ से खोद डाला है।

आस्टेलिया के वैज्ञानिको ने एक दर्जन किम्बर लाईट पाईप होने की किया था पुष्टि…

ढाई दशक पूर्व आस्ट्रेलिया से पहुंचे वैज्ञानिको ने इन हीरा खदानो में एक दर्जन से ज्यादा किम्बर लाईट पाईप होने की बात सर्वेक्षण के बाद बताई गई थी वैज्ञानिको के अनुसार किम्बर लाईट पाईप कई किमी लंबी होती है और इन पाईप में हीरा चिपका होता है आस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा बहुमुल्य किमती रत्न होने का दावा पायलीखण्ड और बेहराडीह हीरा खदान मे किया गया था।

हीरा खदानो में लगाये सुरक्षा तार के बाड़े और लोहे के गेट तक गायब…

बेहराडीह एवं पायलीखण्ड हीरा खदान क्षेत्र में एक बड़े भू-भाग को जहां हीरा खदान के रूप में चिन्हाकिंत है उन स्थानो को बड़े -बड़े लोहे के हजारो एंगल लगाकर लगभग दोनो खदानो में 20 से 25 हेक्टेयर जमीन को चारो तरफ से घेरा गया था और सामने लोहे गेट लगाये गये थे पर अवैध तस्करी करने वालो ने लोहे के पूरे एंगल के साथ गेट को भी उखाड़कर ले गये है और खदान क्षेत्र में सिर्फ गड्ढे ही नजर आते है।

अब नक्सल मुक्त होने के बाद सरकारी दोहन से क्षेत्र की तकदीर और तश्वीर बदलेगी…

उल्लेखनीय है हीरा खदान ईलाका घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था जिसके कारण जंहा एक ओर पायलीखंण्ड हीरा खदान सुरक्षा चौकी को भी नक्सलियो ने बम से उड़ा दिया था और यहा सुरक्षा के लिए तैनात किये गये बी.एस.एफ के जवानों को वापस बुला लिया गया तो वही पायलीखण्ड हीरा खदान क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग ने वापस ले लिया और हीरा के अवैध उत्खन्न करने वालो ने बेहराडीह हीरा खदान के चौकी तक को बुरी तरह चारो तरफ से खोद डाला। अब मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद हीरा खदान के सरकारी दोहन से जंहा एक ओर इस क्षेत्र के बेरोजगार युवको को रोजगार मिलेगी वही दुसरी ओर मैनपुर देवभोग सहित गरियाबंद जिले की तकदीर और तश्वीर संवरेगी।

हीरा खदान कानूनी विवाद पर जल्द सरकार लेगी फैसला

सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार हीरा खदानो से बेशकीमती हीरो का सरकारी दोहन का सपना अब जल्द पुरा होने वाला है राज्य सरकार ने लगभग 23 वर्षो से अदालती कार्यवाही में फसी इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कानूनी पहल शुरू कर दी है सुत्र बताते है कि सरकार इस मामले में रूची ले रहे है और छत्तीसगढ हाईकोर्ट मे अर्जेंअट हियरिंग के लिए याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, गरियाबद जिले में हीरो के अकुत भंडार के पृष्टि हुए करीब 37-38 साल हो चुके है लेकिन कानूनी विवादों में इसे वर्षो से थाम रखा गया है।

विधायक जनक ध्रुव ने कहा क्षेत्र के विधायक जनक ध्रुव ने कहा हीरा खदान का मामला वर्तमान में कोर्ट में है लेकिन जब भी इसका सरकारी तौर से दोहन किया जाएगा निश्चित रूप से इससे गरियाबंद जिला सहित पूरे प्रदेश का विकास होगा और क्षेत्र के बेरोजगारियों को रोजगार भी नसीब होगी।

टीप- हीरा खदान में अवैध खुदाई के साथ ही टुट फुट चुके सुरक्षा घेरा की तश्वीर।

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