युवाओं से संवाद करने में भी कांग्रेस को आपत्ति, विकास और सुशासन की राजनीति का जवाब विरोध और अफवाहों से देना चाहती है कांग्रेस।
हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। धरसींवा वो विधानसभा के भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश यादव ने युवा संवाद कार्यक्रम के विरोध में कांग्रेस द्वारा किए गए पुतला दहन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस की बौखलाहट और राजनीतिक निराशा अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगी है। युवाओं के भविष्य, शिक्षा, रोजगार, खेल और विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद करने का भी कांग्रेस विरोध कर रही है। आखिर कांग्रेस को युवाओं से संवाद करने में इतनी परेशानी क्यों है? क्या अब देश में युवाओं से उनकी समस्याओं और आकांक्षाओं पर चर्चा करना भी कांग्रेस को गवारा नहीं है?
राकेश यादव ने कहा कि जनता ने चुनाव दर चुनाव कांग्रेस को नकारा तो कभी ईवीएम पर सवाल, कभी एसआईआर का विरोध और अब सकारात्मक कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है। लोकतंत्र में जनता के जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रही है। चुनाव में हार का ठीकरा कभी व्यवस्था पर तो कभी जनता के निर्णय पर फोड़ना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।

राकेश यादव ने छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर कांग्रेस नेताओं की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस छत्तीसगढ़ की जनता ने उन्हें पद, प्रतिष्ठा और राजनीतिक पहचान दी, उसी छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर प्रदेश की अस्मिता और गौरव के साथ खड़े होने के बजाय दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को प्राथमिकता देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे कांग्रेस नेताओं का छत्तीसगढ़ प्रेम भी जनता के सामने उजागर हो गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का इतिहास किसी एक राजनीतिक दल या परिवार की जागीर नहीं है। इसके लिए प्रदेशवासियों ने लंबा संघर्ष किया, अनेक आंदोलनकारियों ने अपना सर्वस्व समर्पित किया। तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्य निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ और केंद्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का ऐतिहासिक निर्णय लेकर 1 नवंबर 2000 को प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा दिया। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जिसे राजनीतिक स्वार्थ के कारण भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी लगातार निर्वाचन आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं के इतिहास और उनकी गरिमा का सम्मान करना भी सीखना चाहिए। टी.एन. शेषन, आर.के. त्रिवेदी और एम.एस. गिल जैसे मुख्य निर्वाचन आयुक्तों के कार्यकाल भारतीय निर्वाचन व्यवस्था के इतिहास का हिस्सा हैं। लोकतंत्र में संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।
राकेश यादव ने कहा कि युवा कांग्रेस द्वारा युवा संवाद का विरोध करना अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण है। युवा मितान क्लब और गोबर खरीदी जैसी योजनाओं को लेकर उठे सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस आज युवाओं के बीच हो रहे संवाद को बाधित करने की राजनीति कर रही है। कांग्रेस को समझना चाहिए कि युवा अब केवल नारों और राजनीतिक दिखावे से प्रभावित होने वाले नहीं हैं, वे विकास, रोजगार, अवसर और भविष्य की बात चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा केवल युवा संवाद ही नहीं, बल्कि गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर महिलाओं, बुजुर्गों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और समाजसेवियों से भी संवाद करेगी। जनता को विकास, एकता, सुशासन और प्रदेश की प्रगति से जोड़ने का अभियान निरंतर जारी रहेगा। कांग्रेस के भ्रामक प्रचार और झूठे आरोपों का जवाब तथ्यों के साथ जनता के बीच दिया जाएगा।
कांग्रेस पुतला दहन और विरोध की राजनीति करती रहे, भाजपा जनता से संवाद और प्रदेश के विकास की राजनीति करती रहेगी। छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के शासन और उसके राजनीतिक चरित्र को भली-भांति समझ चुकी है। कांग्रेस को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने पांच वर्षों के कार्यकाल और अपने राजनीतिक आचरण का आत्ममंथन करना चाहिए।



