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धान खरीदी में 15 दिन की कटौती और पटवारियों की हड़ताल, अन्नदाताओं का हक मारने का भाजपा सरकार का सुनियोजित षड्यंत्र – कांग्रेस

धान खरीदी में 15 दिन की कटौती और पटवारियों की हड़ताल, अन्नदाताओं का हक मारने का भाजपा सरकार का सुनियोजित षड्यंत्र – कांग्रेस

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। छत्तीसगढ़ के अन्नदाता किसानों के साथ सरकार द्वारा की जा रही खुली धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार ने धान खरीदी की अवधि को 15 दिन घटाकर किसानों का गला घोंटने का जो षड्यंत्र रचा है, इस बार धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक ही तय की गई है, यानी पिछले वर्षों की तुलना में पूरे 15 दिन कम। ऊपर से 31 अक्टूबर तक पंजीयन की समयसीमा रखी गई, जबकि पटवारी पिछले लंबे समय से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते किसानों के पंजीयन और अप्रूवल के काम पूरी तरह अटके हुए हैं। नामांतरण, फौत और बटांकन जैसे राजस्व के हजारों मामले तहसीलों में लंबित हैं, और उपार्जन केंद्रों, धान खरीदी केंद्रों में कागजी तैयारियों के अलावा जमीन पर कोई काम नहीं हुआ है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं के साथ एक बहुत बड़ा विश्वासघात हो रहा है। सरकार जानबूझकर प्रशासनिक तंत्र को फेल कर रही है ताकि छत्तीसगढ़ के किसानों को उनके अपने हक के धान बेचने से रोका जा सके। सरकार की अदूरदर्शिता और कुप्रबंधन का आलम यह है कि एक तरफ पोर्टल बंद होने की कगार पर है और दूसरी तरफ मैदानी अमला, पटवारी हड़ताल पर है। सरकार ने जानबूझकर समयसीमा नहीं बढ़ाई ताकि तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का बहाना बनाकर लाखों किसानों को उनका धान बेचने से वंचित किया जा सके। कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि धान खरीदी के दिन घटने से कतारें लंबी होंगी, टोकन कटने में मारामारी मचेगी और बिचौलियों-दलालों को फायदा पहुंचाने का रास्ता खुलेगा। राजस्व रिकॉर्ड अपडेट न होने से छोटे और सीमांत किसान पंजीयन से बाहर हो जाएंगे। यह लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों को धान बेचने से रोकने का एक सुनियोजित सरकारी षड्यंत्र है। एक तरफ पटवारी हड़ताल पर हैं, राजस्व रिकॉर्ड अपडेट करने के काम अटके हैं, और दूसरी तरफ पंजीयन की समयसीमा खत्म कर दी गई। सरकार किसानों को कागजी दांव-पेंच में उलझाकर उनका हक मारना चाहती है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और किसान यहां की रीढ़ हैं। भाजपा सरकार किसानों के मुंह से निवाला छीनने का काम कर रही है। 15 दिन खरीदी कम करना और उपार्जन केंद्रों में आज तक झाड़ू तक नहीं लगना, वहां तैयारियां पूरी होने का झूठा दावा करना इस बात का प्रमाण है कि यह सरकार धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है। उपार्जन केंद्रों में सन्नाटा पसरा होना इस बात का सबूत है कि इस सरकार को अन्नदाताओं के दर्द से कोई सरोकार नहीं है। साय सरकार का फॉर्मूला साफ है, पंजीयन फंसाओ, पटवारी हड़ताल भड़काओ और धान खरीदी के दिन घटाओ। यह किसानों को आत्महत्या के मुहाने पर धकेलने की साजिश है।

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