हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। डीए और एरियर्स को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि चुनाव से पहले भाजपा ने मोदी की गारंटी के नाम पर केंद्रीय कर्मचारियों के समान छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ता, डीए और एरियर्स देने का बड़ा वादा किया था। हकीकत यह है कि 2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के बाद भी आज भी राज्य के कर्मचारी केंद्रीय स्तर 63 प्रतिशत से 3 प्रतिशत पीछे हैं और महीनों की देरी से डीए लागू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने डीए अभी 58 से 60 प्रतिशत किया है जबकि केंद्र में जुलाई से ही 63 प्रतिशत है। 10 महीने बीत जाने के बाद भी एरियर्स न देना और 1 जनवरी से 5 प्रतिशत और 1 जुलाई से स्वीकृत 3 प्रतिशत डीए को रोके रखना भाजपा सरकार की नीयत में खोट को साफ दिखाता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ का शासकीय कर्मचारी और पेंशनर वर्ग अपने ही हक की भीख मांगने को मजबूर है। चुनाव के वक्त भाजपा का संकल्प और मोदी की गारंटी का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार आज छत्तीसगढ़ के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के डीए और एरियर्स पर कुंडली मारकर बैठ गई है। केंद्रीय कर्मचारियों को 63 प्रतिशत डीए मिल रहा है और हमारे राज्य के कर्मचारियों को वंचित रखा जा रहा है। पिछले 10 महीनों का एरियर्स और 3 महीने से लंबित 3 प्रतिशत डीए और पिछले तीन महीने से 2 प्रतिशत डीए डकार जाना इस सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीति का सबसे बड़ा सबूत है। हम मांग करते हैं कि सरकार दीवाली से पहले एरियर्स और डीए का पूरा भुगतान करे, वरना कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक कर्मचारियों के साथ खड़ी होकर इस तानाशाही सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।

भाजपा सरकार की वादाखिलाफी और कर्मचारी-विरोधी नीतियों को बेनकाब करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार के पास प्रशासनिक कुप्रबंधन और वित्तीय दिवालियापन की स्थिति है। जनता का पैसा विज्ञापनों और फिजूलखर्ची में बहाया जा रहा है, लेकिन पसीना बहाने वाले कर्मचारियों और जीवनभर सेवा करने वाले पेंशनर्स के हक पर कैंची चलाई जा रही है। डीए और एरियर्स का भुगतान रोकना सीधे तौर पर कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों पर डाका डालना है। प्रदेश का लाखों कर्मचारी और पेंशनर वर्ग त्योहारी सीजन, दीवाली के समय भी अपने जायज हक के लिए तरस रहा है। महंगाई आसमान छू रही है, और भाजपा सरकार कागजी गारंटियों के जरिए सिर्फ लॉलीपॉप थमा रही है। दिल्ली के इशारों पर चलने वाली यह सरकार छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को उनका हक देने में कंजूसी कर रही है। क्या छत्तीसगढ़ के कर्मचारी दोयम दर्जे के नागरिक हैं? कर्मचारियों के हक का पैसा न देना इस सरकार की कर्मचारी-विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को प्रताड़ित करना इस सरकार की नीति बन चुकी है।



