हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय में दो वर्षों से भर्तियां लंबित हैं और दूसरी ओर महत्वपूर्ण चयन प्रक्रियाओं के दौरान कुलपति के अवकाश को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आखिर यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई व्यवस्था? पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था है। यहां भर्ती प्रक्रिया में देरी केवल प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य और विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था से जुड़ा सवाल है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने पूछा कि दो साल में विश्वविद्यालय प्रशासन कितने पदों पर भर्ती पूरी कर पाया? कितने पद खाली हैं? कितनी भर्ती प्रक्रियाएं शुरू हुई और कितनी आज भी अधर में हैं? भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता है तो फिर जानकारी सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट क्यों? विज्ञापन से लेकर पात्रता सूची, आपत्तियां, दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार, चयन समिति और अंतिम चयन सूची-हर चरण का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सबसे गंभीर सवाल कुलपति के महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान अवकाश पर जाने को लेकर है।क्या यह सिर्फ संयोग है कि महत्वपूर्ण साक्षात्कार या चयन प्रक्रिया के आसपास कुलपति अवकाश पर चले जाते हैं? यदि अवकाश सामान्य प्रशासनिक अथवा व्यक्तिगत कारणों से लिया गया है तो अवकाश आवेदन, स्वीकृति और उस अवधि में विश्वविद्यालय में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे किसी भी प्रकार की आशंका और भ्रम स्वतः समाप्त हो जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कुलपति पद जवाबदेही से ऊपर का पद नहीं है। विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और प्रदेश की जनता की सार्वजनिक शैक्षणिक संस्था है। विश्वविद्यालय की भर्तियों में प्रदेश के युवाओं को पारदर्शी और समान अवसर मिलना चाहिए। किसी भी अभ्यर्थी का चयन उसकी योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी प्रभाव, सिफारिश या अन्य आधार पर। हाल की सभी शैक्षणिक नियुक्तियों में विज्ञापन की शर्तों से लेकर चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता तक स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए। विश्वविद्यालय की अपनी वेबसाइट पर भर्ती संबंधी सूचनाएं, पात्रता सूची, साक्षात्कार और चयन संबंधी प्रक्रियाएं प्रकाशित होती रही हैं। इसलिए भर्ती प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड जांच के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने मांग की पिछले दो वर्षों की सभी शैक्षणिक भर्तियों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लंबित भर्तियों की पूरी सूची और उन्हें लंबित रखने के कारण सार्वजनिक किए जाएं। चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता, दस्तावेज और चयन प्रक्रिया का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए। महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान कुलपति के अवकाश से संबंधित आवेदन, स्वीकृति और उस अवधि में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों की जांच की जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोष पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।



