छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में धार्मिक मंत्रोच्चारण संबंधी मामले में उच्च न्यायालय की सुनवाई सम्पन्न, भविष्य में अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में पुनः न्यायालय जाने की स्वतंत्रता…
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हरियर एक्सप्रेस, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी धार्मिक मंत्रोच्चारण संबंधी आदेश को चुनौती देते हुए पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड एवं राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त श्री अब्दुल सलाम रिज़वी, पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग एवं राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त श्री महेंद्र छाबड़ा तथा TNRAT बिलासपुर जिला अध्यक्ष श्री शफ़ीक़ अहमद द्वारा, तहफ़्फ़ुज़-ए-नामूस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट (TNRAT) के सहयोग से माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज सुनवाई सम्पन्न हुई।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से माननीय न्यायालय को अवगत कराया गया कि संबंधित आदेश जारी अवश्य किया गया है, किंतु वर्तमान समय तक उसका व्यवहारिक क्रियान्वयन नहीं किया गया है। शासन के इस कथन को अभिलेख पर लेते हुए माननीय न्यायालय ने वर्तमान जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
साथ ही, माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता (Liberty) प्रदान की कि यदि भविष्य में किसी भी विद्यार्थी को उसकी इच्छा अथवा धार्मिक आस्था के विरुद्ध किसी धार्मिक प्रार्थना या मंत्रोच्चारण में सम्मिलित होने के लिए बाध्य किया जाता है, तो वे पुनः उचित कानूनी उपाय अपनाते हुए न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से इस प्रकरण का पक्ष TNRAT लीगल सेल के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता डॉ. आमिर ख़ान (उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़) द्वारा प्रस्तुत किया गया।
TNRAT ने माननीय न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए कहा कि संगठन संविधान एवं विधि के दायरे में रहकर सभी विद्यार्थियों के मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता तथा समानता की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा। यदि भविष्य में किसी भी विद्यार्थी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो संगठन आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

संगठन ने यह भी कहा कि अब राज्य शासन को इस विषय पर स्पष्ट करना चाहिए कि यदि संबंधित आदेश का क्रियान्वयन किया ही नहीं जाना था, तो उसे जारी करने का उद्देश्य क्या था। ऐसे आदेश समाज, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के बीच स्वाभाविक रूप से भ्रम तथा संवैधानिक आशंकाएँ उत्पन्न करते हैं। अतः शासन को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जारीकर्ता:
तहफ़्फ़ुज़-ए-नामूस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट (TNRAT)
TNRAT लीगल सेल



