June 5, 2026

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ट्रक ड्राइवर मर्डर केस में 9 साल बाद आया न्याय, शव दफनाने वाले खलासी को आजीवन कारावास

ट्रक ड्राइवर मर्डर केस में 9 साल बाद आया न्याय, शव दफनाने वाले खलासी को आजीवन कारावास

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हरियर एक्सप्रेस, बलौदाबाजार। बलौदाबाजार जिले में ट्रक ड्राइवर की हत्या कर शव को तालाब किनारे दफनाने के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायालय बलौदाबाजार ने आरोपी खलासी मोतीराम ध्रुव को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के बाद मृतक परिवार ने राहत जताई, जबकि इलाके में एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। सरकारी वकील एवं लोक अभियोजक थानेश्वर वर्मा के मुताबिक, मामला जुलाई 2017 का है।

राकेश बघेल ट्रक चालक था और वह ट्रक क्रमांक CG 04 JC 4530 में सीमेंट लोड कर हिरमी सीमेंट प्लांट से चंद्रपुर के लिए रवाना हुआ था। ट्रक में उसके साथ खलासी मोतीराम ध्रुव भी मौजूद था। यात्रा के दौरान दर्रा गांव के पास आरोपी ने कथित तौर पर राकेश बघेल की हत्या कर दी। इसके बाद शव को तालाब किनारे ले जाकर गड्ढा खोदकर दफना दिया, ताकि घटना का कोई सुराग न मिल सके। हत्या के बाद आरोपी मृतक का मोबाइल फोन, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और करीब 13 हजार रुपए नकद लेकर फरार हो गया।

कुछ समय बाद कंपनी के अन्य ट्रक चालकों ने रास्ते में ट्रक को लावारिस हालत में खड़ा देखा। जांच के दौरान ट्रक के भीतर खून के धब्बे मिले। जैक रॉड और पाना पर भी खून के निशान दिखाई दिए, जिसके बाद हत्या की आशंका गहरा गई। कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद कसडोल थाना में गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।

कुछ दिनों बाद गांव के पास एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे मृतक के बड़े भाई ने शव की पहचान राकेश बघेल के रूप में की। इस बीच आरोपी मोतीराम ध्रुव लगातार फरार था, जिससे पुलिस का शक और मजबूत हो गया। कसडोल पुलिस ने आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी। बाद में सूचना मिली कि आरोपी अपने गांव बूढ़ागहन आने वाला है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि हत्या के बाद मृतक के दस्तावेज और अन्य सामान उसने अपने पास रख लिए थे सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 33 गवाह पेश किए। गवाहों ने अदालत को बताया कि घटना से पहले मृतक और आरोपी को एक साथ ट्रक में जाते देखा गया था। इसके अलावा मृतक का सामान आरोपी के कब्जे से बरामद होना और घटना के बाद उसका फरार रहना भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।

लोक अभियोजक थानेश्वर वर्मा ने अदालत में तर्क दिया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला आरोपी की संलिप्तता साबित करती है। द्वितीय अपर सत्र न्यायालय बलौदाबाजार की न्यायाधीश संजया रात्रे ने आरोपी मोतीराम ध्रुव को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 1000 रुपए जुर्माना, धारा 201 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास और 1000 रुपए अतिरिक्त जुर्माना की सजा सुनाई।

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