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धान के समर्थन मूल्य में मात्र 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किसानो पर अत्याचार – कांग्रेस

धान के समर्थन मूल्य में मात्र 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किसानो पर अत्याचार – कांग्रेस

मनमोहन सरकार ने 10 साल में धान के समर्थन मूल्य में 147 प्रतिशत बढ़ोत्तरी किया था, मोदी सरकार ने 12 साल में मात्र 44 प्रतिशत बढ़ाया

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हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि धान के समर्थन मूल्य में मात्र 3 प्रतिशत की वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। केंद्र सरकार के द्वारा तय समर्थन मूल्य में मात्र 72 रू. की बढ़ोत्तरी किया है। कृषि की लागत दिनों दिन बढ़ रही है मजदूरी, खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमत आसमान छू रही है। 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने का वायदा जुमला साबित हुआ, किसानों को उम्मीद थी कि मोदी जी किसानों से 2014 में किए गए अपने सी-2 फार्मूले पर लागत से 50 प्रतिशत लाभ के साथ एमएसपी देने के वादे पर अमल करेंगे, लेकिन मोदी जी के तीसरे कार्यकाल में भी किसानों को निराशा ही हाथ लगी है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि धान एमएसपी की तुलना (UPA vs Modi Govt)UPA सरकार ¼2004&2014½% 2003&04 में धान (सामान्य) का MSP ₹550 प्रति क्विंटल था, जो 2013-14 के अंत तक लगभग ₹1,310-₹1,360 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। अर्थात कांग्रेस के नेतृत्व वाली *यूपीए सरकार के 10 साल में 147 प्रतिशत वृद्धि किया था। 14.7 प्रतिशत प्रतिवर्ष।* मोदी सरकार (2014-2026) % 2014-15 में धान का MSP ₹1,360-₹1,400 (सामान्य) था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए ₹2,441 प्रति क्विंटल (सामान्य) किया गया है। अर्थात मोदी के 12 साल में कुल वृद्धि 1081/- अर्थात 44.28 प्रतिशत, औषत मात्र 3.69 प्रतिशत प्रतिवर्ष। 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने और सी 2 फार्मूले से लागत पर 50 प्रतिशत लाभ देने का वादा करके सत्ता में आई मोदी सरकार ने एक बार फिर किसानों को धोखा दिया है। इस बार खरीफ़ सीजन 2026-27 के लिए मंजूर किए गए एमएसपी की घोषणा के अनुसार धान पर कुल वृद्धि 3 प्रतिशत मात्र है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सी 2 फार्मूले के अनुसार कृषि लागत में नकदी खर्च, खाद, बीज, पानी, रसायन, मजदूरी के साथ ही गैर नकदी लागत के अलावा जमीन की लीज रेंट और उससे जुड़ी खर्च पर लगने वाले ब्याज को भी शामिल किया जाना चाहिए, साथ-साथ किसान परिवार के मेहनत के अनुमानित लागत को भी जोड़ा जाना चाहिए, लेकिन दुर्भावनापूर्वक लागत में इनमें से कई खर्चाे को शामिल नहीं किया गया। हाल ही में विगत 10 फरवरी 2026 से केंद्र की मोदी सरकार ने पोटाश की कीमत में 15 प्रतिशत और एनपीके की कीमत में 30 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्धि की है। न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि और बढ़ती महंगाई के चलते धान के खेती में कृषि लागत में एक साल के दौरान औसत वृद्धि 8 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन किसान विरोधी मोदी सरकार ने एमएसपी में मात्र 3 प्रतिशत की ही वृद्धि की है जो किसानों के साथ अन्याय है, अत्याचार है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा ने राज्य के विधानसभा चुनाव में किसानों से वादा किया था कि धान की कीमत 3100 रु. देंगे। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद 2023 से लेकर अभी तक धान के समर्थन मूल्य में प्रतिवर्ष जो बढ़ोतरी हुई वह 117 रु. $ 69 रु. $ इस वर्ष के 72 रु. कुल = 258 रु., अतः सरकार घोषित करें किसानों को धान की इस वर्ष 3100 $ 258 = 3358 रु. में खरीदी की जायेगी। साय सरकार पिछले दो वर्ष से जो समर्थन मूल्य की बढ़ोतरी हुई है उसको 3100 में जोड़कर 3358 रु. प्रतिक्विंटल की दर से किसानों को नहीं दे रही, इससे किसानों को बढ़े समर्थन मूल्य का फायदा नहीं मिल रहा, केंद्र जो समर्थन मूल्य बढ़ा रहा उसको राज्य सरकार डकार जा रही, यह किसानों से धोखा है।

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