विधानसभा में सवालों से घिरे मंत्री केदार कश्यप, विपक्ष ने दो बार किया बहिर्गमन…
हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को प्रश्नकाल में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कई मुद्दों पर पूछे गए सवालों के दौरान मंत्री केदार कश्यप विपक्ष के निशाने पर रहे। जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने विरोध में दो बार सदन से बहिर्गमन किया।
प्रश्नकाल की शुरुआत में विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने डोंगरगढ़ स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा के भवन निर्माण को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या वर्ष 2023 में बैंक भवन निर्माण के लिए अनुमति दी गई थी और यदि भूमि पर अतिक्रमण है तो उसे कब तक हटाया जाएगा।
इस पर मंत्री केदार कश्यप ने लिखित जवाब में बताया कि बैंक भवन निर्माण के लिए 39 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन भूमि पर अतिक्रमण होने के कारण दूसरी जगह भवन निर्माण के लिए जमीन की मांग की गई है। फिलहाल बैंक किराये के भवन में संचालित हो रहा है और इसके लिए 19,400 रुपये मासिक किराया दिया जा रहा है।
मंत्री के जवाब के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हस्तक्षेप करते हुए सवाल उठाया कि बैंक के लिए कितनी जमीन आवंटित की गई है और उसमें से कितनी जमीन पर अतिक्रमण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त जमीन होने के बावजूद अतिक्रमणकारियों को बचाने के लिए बैंक भवन दूसरी जगह बनाने की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे पर सदन में नारेबाजी शुरू हो गई और कांग्रेस विधायकों ने बहिर्गमन कर दिया।
इसके बाद विधायक ओंकार साहू ने प्रदेश में वाहनों की ओवरलोडिंग और बिना भौतिक परीक्षण के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जाने को लेकर सवाल किया। मंत्री के जवाब में बताया गया कि बिना परीक्षण के कोई फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता, जबकि ओवरलोडिंग और अन्य उल्लंघनों के 77,810 प्रकरण दर्ज कर 42.79 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई है।
हालांकि इस मुद्दे पर भी विपक्ष ने मंत्री से अतिरिक्त जानकारी मांगी, जिस पर जवाब स्पष्ट नहीं होने के कारण फिर से हंगामा हुआ। इस दौरान सभापति धरमलाल कौशिक को हस्तक्षेप करना पड़ा।
वहीं महासमुंद जिले के तेंदुकोना में शासकीय नवीन महाविद्यालय भवन निर्माण को लेकर विधायक द्वारिकाधीश यादव ने सवाल उठाया। जवाब में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि भवन निर्माण के लिए वर्ष 2022-23 में 465.84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन नाबार्ड से राशि स्वीकृत नहीं होने के कारण निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है।
मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए विपक्षी विधायकों ने अधिकारियों पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी रही।



