March 7, 2026

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सरकार की विफलता का मेला धरना स्थल पर लगा है…

सरकार की विफलता का मेला धरना स्थल पर लगा है…

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हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। कांग्रेस ने मध्यानभोजन रसोईए, सीएएफ और डीएड शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन का समर्थन किया है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार की विफलता का मेला माना तूता धरना स्थल पर दिख रहा है ।विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान तमाम अनियमित कर्मचारियों से 100 दिन के भीतर नियमितीकरण का वादा मोदी की गारंटी के नाम पर भारतीय जनता पार्टी ने किया, लेकिन सरकार आने के बाद से अपने वादे और मोदी की गारंटी से भाजपा की सरकार पलट गई है, नौकरी की मांग को लेकर विगत एक महीने से धरने पर बैठे सीएएफ अभ्यर्थियों से धक्का मुक्की और मारपीट पर उतारू है यह सरकार, लंबे समय से अनशन पर बैठी एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने पर एम्बुलेंस तक को नहीं जाने दिया गया, यह इस सरकार की अमानवीयता की पराकाष्ठा है।डीएड अभ्यर्थी की भर्ती नहीं करना सरकार की अकर्मण्यता का सबसे बड़ा उदाहरण है इनको बीएड अभ्यर्थियों से खाली हुए पद में भरना है सरकार वह भी नहीं कर पा रही है।

प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि स्कूलों में मध्यानभोजन बनाने वाले रसोईयों की मजदूरी मात्र 66 रुपया है, उनकी मांग न्यूनतम मजदूरी के तहत तय राशि की ही है, उससे ज्यादा उनकी मांग नहीं है फिर भी विगत 22 दिन से इस सरकार की कान में जू तक नहीं रेंग रहा है, आंदोलनकारियों में 95 प्रतिशत महिलाएं हैं और ज्यादातर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से आकर यहां कड़कड़ाती ठंड में अनशन के लिए बाध्य हैं, यह सरकार उनकी मांगे सुनने के बजाय उनके आंदोलन को कुचलने में जुटी हुई है। भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ के युवा ठगे गए, एक लाख सरकारी नौकरी का वादा था, संविदा, अनियमित कर्मचारियों को नियमितीकरण का वादा था उल्टे अनियमित कर्मचारियों की नौकरी छीनी जा रही है, विद्या मितान, अतिथि शिक्षक, सफाई कर्मचारी, मध्यानभोजन रसोईए और अनेकों विभागों में संविदा कर्मी नौकरी से निकाल दिए गए।

कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि डीएड अभ्यर्थियों के पक्ष में तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय है, प्रक्रिया हो भी चुकी है, लेकिन इस सरकार की दुर्भावना के चलते ही बाकी के शेष अभ्यर्थी अन्याय के शिकार होकर आंदोलन करने मजबूर हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कोई भी वर्ग संतुष्ट नहीं है, लेकिन यह सरकार जायज मांगों को सुनना ही नहीं चाहती, बर्बरतापूर्वक दमन पर उतर आयी है।

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