March 7, 2026

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एसआईआर में करेक्शन और नाम जुड़वाने लगाना पड़ रहा है बूथों के चक्कर, समय सीमा बढ़ाया जाये – कांग्रेस

एसआईआर में करेक्शन और नाम जुड़वाने लगाना पड़ रहा है बूथों के चक्कर, समय सीमा बढ़ाया जाये – कांग्रेस

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हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। एसआईआर प्रक्रिया में दावा आपत्ति को लेकर हो रही असुविधा को दूर करने और तिथि बढ़ाने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूर्व निर्धारित शेड्यूल के तहत 22 जनवरी तक ही दावा आपत्ति लिए जाने हैं, छत्तीसगढ़ में एस आई आर प्रक्रिया के दौरान 27 लाख मतदाताओं के नाम काटने के बाद स्थित है कि अब तक केवल 1 लाख 82 हजार दावा आपत्ति के आवेदन ही जमा हुए हैं, जिन 19 लाख 13 हजार मतदाता तक बीएलओ पहुंच नहीं पाए उन्हें शिफ्टेड बता दिया गया, अब अंतिम 3 दिन ही शेष है, दस्तावेज जमा करने के बाद दावा आपत्ति की प्रक्रिया में अब नाम जुड़वाने से लेकर मतदाता सूची में अपना नाम यथावत बचाए रखने के लिए मतदाता परेशान हो रहे हैं, अधिकांश मतदाताओं तक नोटिस पहुंचा ही नहीं है तो फिर समय पर जवाब देना उनके लिए संभव कैसे होगा?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य में धान उपार्जन की प्रक्रिया चल रही है। बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, जशपुर और बस्तर के क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग रोजी रोटी के लिए पलायन कर प्रदेश से बाहर चले गए हैं, केवल बस्तर संभाग में ही 600 से अधिक गांव नक्सल प्रभावित थे जो वर्षों से बस्तर को छोड़कर तेलंगाना, आंध्र और महाराष्ट्र चले गए थे उनका एस आई आर कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है। 19 लाख विस्थापित बताएं गए मतदाताओं में अधिकांश इसी तरह के हैं, इसलिए आवश्यक है कि इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि निर्वाचन आयोग के दावे केवल कागजी है असलियत यह है कि प्रदेश के 19 लाख से अधिक मतदाताओं तक प्रदेश के बी एल ओ पहुंचे ही नहीं हैं, जब ऐसे लाखों मतदाताओं को शिफ्टेड बता दिया गया है तो ऐसे में बीएलओ अब नोटिस किसे बांटे और कहां जाकर बांटे? क्योंकि निर्वाचन आयोग के दावे के अनुसार वार्ड में उन लोगों के न तो मकान हैं और न ही उनका कोई नामोंनिशान, अब वह किस वार्ड में रह रहे हैं, उन्हें कहां जाकर नोटिस देना है यह बीएलओ को समझ में नहीं आ रहा है। कई बीएलओ मोहल्ले की दीवार पर उन लोगों के नोटिस चस्पा कर रहे हैं, जिनको यह देना है। जमीनी हकीकत यह है कि प्रभावित मतदाताओं के लिए बीएलओ को ढूंढना भारी मशक्कत भरा काम हो गया है। ऐसे में यदि तिथि नहीं बढ़ाई गई तो लाखों मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो पायेंगे।

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