March 7, 2026

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धान खरीदी की धीमी गति से किसान परेशान – कांग्रेस

धान खरीदी की धीमी गति से किसान परेशान – कांग्रेस

सोसायटी से उठाव नहीं होने के कारण जाम की स्थिति, खरीदी प्रभावित हो रही है

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हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर जानबूझकर धान खरीदी प्रक्रिया को धीमा करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि 15 नवंबर से धान की खरीदी प्रदेश में शुरू हुई है, अब दिसंबर का महीना भी बीत रहा है, आगे लगभग एक माह ही खरीदी का समय शेष रह गया हैं, लेकिन अभी तक तय लक्ष्य से केवल 20 प्रतिशत किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। यह सरकार उपार्जन की गति बढ़ाने के बजाय और धीमा कर रही है। राइस मिलरों को आरओ नहीं काटा जा रहा है, 90 प्रतिशत संग्रहण केंद्रों में परिवहन के अभाव में सोसायटियों में धान जाम हो गए हैं, जिससे तौलाई प्रभावित हो रही हैं। एनआईसी के माध्यम से उपार्जन केंद्रों में दैनिक लिमिट में कटौती कर दी गई है, जिससे किसान चिंतित हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार की दुर्भावना के कारण ही छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार धान खरीदी व्यवस्था इतनी बदहाल है। बस्तर के किसान, संग्रहण केंद्रों में व्याप्त अव्यवस्था और अनियमिताओं के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर रहे हैं, महासमुंद के किसान टोकन नहीं कटने से व्यथित होकर अपना गला रेतने मजबूर हैं, बिंद्रानवागढ़ के किसानों को बारदाना नहीं मिल रहा है, ऑनलाईन टोकन ऐप 2 मिनट के भीतर बंद हो जा रहा है और ऑफलाईन टोकन की कालाबाजारी भाजपाई कर रहे है। अधिक तौलाई करके किसानों के धान में कांटा मारने का खेल तो पूरे प्रदेश में निर्बाध चल रहा है। स्थिति यह है कि हर धान उपार्जन केंद्र में 500 से 1000 कट्टा अतिरिक्त धान मौजूद है जो अधिक तौलाई करके इकट्ठा किया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एग्रीस्टेक पोर्टल और गिरदावली में जानबूझकर गड़बड़ियों की गई है ताकि किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना पड़े। वनभूमि पट्टा धारक 90 प्रतिशत किसानों का एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन ही नहीं किया गया है और इसकी वजह से वे अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। राज्य सरकार के एकीकृत किसान पोर्टल और केंद्र सरकार के एग्री स्टेक पोर्टल में भिन्नता है जिसका नुकसान भी किसानों को ही भोगना पड़ रहा है।

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