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आजादी की लड़ाई के दौरान आरएसएस सरदार पटेल के विरोध में खड़ी थी…

आजादी की लड़ाई के दौरान आरएसएस सरदार पटेल के विरोध में खड़ी थी…

सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर बता दिया था देश की एकता अखंडता सर्वोपरि।

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज सरदार पटेल का गुणगान करने वाले भाजपाई आजादी की लड़ाई के दौरान सरदार पटेल के विरोध में खड़ी थी। आजादी की लड़ाई का विरोध करने वाली आरएसएस की विचारधारा और कृत्यों के सरदार पटेल कट्टर विरोधी थे। वे आरएसएस को देश के लिए घातक मानते थे। महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन गृह मंत्री पटेल ने 4 फरवरी 1948 को आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर बता दिया था, देश की एकता और अखंडता उनके लिए सर्वोपरि थी। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के द्वारा आरएसएस पर प्रतिबंध हटाए जाने की मांग पर कहा था कि संघ के कारण देश में ऐसा माहौल तैयार हुआ जिसके कारण महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। उन्होंने कहा कि संघ की गतिविधियां देश सरकार के अस्तित्व के लिए खतरा थी।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्य है कि आजादी की लड़ाई के दौरान जब पूरा देश गांधी, नेहरू, सरदार पटेल जैसे नेताओं के नेतृत्व में अंग्रेजो के खिलाफ लड़ रहा था, आरएसएस के लोग मुस्लिम लीग के साथ मिलकर अंग्रेजों के सहयोगी की भूमिका में थे। इसका उद्देश्य देश की आजादी की लड़ाई का विरोध करना था। 1942 में कांग्रेस, महात्मा गांधी की अगुवाई में भारत छोड़ो आंदोलन चला रही थी, तब भाजपा के पितृ पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंग्रेजी हुकूमत को सलाह दे रहे थे कि भारत छोड़ो आंदोलन को क्रूरतापूर्वक दमन किया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरदार पटेल का मानना था कि आरएसएस की स्थापना से इनका चरित्र और क्रियाकलाप राजनैतिक लाभ के लिए नफरत और उन्माद फैलाने षड्यंत्र का ही रहा है। ना कोई नियम ना संविधान ना पंजीयन ताकि किसी षड़यंत्र के उजागर होने पर किसी भी व्यक्ति को अपने से संबंधित या पृथक बता सके। सांस्कृतिक संगठन होने का दावा इनका राजनीतिक पाखंड है। असलियत यह है कि पर्दे के पीछे रहकर षडयंत्र रचना और रिमोट कंट्रोल से सत्ता हासिल करना है। बंगाल में मुस्लिम लीग के साथ इन्होंने सरकार भी बनाया।

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