काज़ी ए शहर के अंतिम दीदार के लिए उमड़ा जन सैलाब, मदरसे में ही किया गया दफ्न, जल्द होगी दरगाह शरीफ की तामीर…
नवेद खां क़ादरी / हरियर एक्सप्रेस

रायपुर। वली ए क़ामिल बाबा मोहम्मद अली फारूकी साहब रहमतुल्लाह तआला अलैह के अंतिम दीदार के लिए हजारों का जन सैलाब आज मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन बैजनाथपारा रायपुर पहुंचा जहां उनके मुरीदों का हुजूम उनके आखरी दर्शन के लिए बेताब दिखाई दिया। वहीं उनके हज़ारों चाहने वाले समर्थकों ने एक साथ उनकी नमाज़ ए जनाज़ा को अदा कर खुद को सौभाग्यशाली बताया। नमाज़ ए जनाज़ा के बाद सबकी सहमति से उन्हें मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन बैजनाथपारा में ही दफ्न किया गया जहां उनकी दरगाह शरीफ का निर्माण कराया जाएगा। बाबा फारूकी के अंतिम दर्शन को आए हुए लोगो ने कहा कि हमें लग ही नहीं रहा है कि हमारे पीर साहब अब इस दुनियां में नहीं रहे बल्कि ऐसा लग रहा है कि वह मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन बैजनाथपारा में ही हयात है और हमारे बीच मौजूद हैं। हम अब हर साल बाबा फारूकी का उर्स पाक मानने इसी तरह से आएंगे और हर साल इसी तरह से यह मजमा उर्स पाक में चार चांद लगाएगा।

बता दें कि हज़रत बाबा मोहम्मद अली फारूकी साहब रहमतुल्लाह तआला अलैह सिर्फ काज़ी ए शहर ही नहीं बल्कि शरीयत, मारेफ़त, तरीकत और हकीकत के पासबंद थे। उन्हें किताबें लिखने में भी महारत हासिल थी। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में बहुत सी इस्लामी किताबें लिखी है। इतनी बड़ी शख्सियत होने के बावजूद वह गरीब से गरीब मुरीद के घर बुलाने पर बड़ी ही सादगी के साथ पहुंच जाया करते थे। जिसके फल स्वरूप आज हजारों की संख्या में उनके अंतिम दर्शन पाने के लिए लोग उनके दरबार में पहुंचे हुए थे। ज्ञात हो कि बाबा मोहम्मद अली फारूकी साहब रहमतुल्लाह तआला अलैह को बहुत से सिलसिलों से खिलाफत हासिल थी। कई वलियों ने उनके सर पर दस्तार बांधी थी। वह बाबा फरीद गंज शकर रहमतुल्लाह तआला अलैह की औलाद में से थे और इस्लाम के दूसरे खलीफा अमीरूल मोमिनिन हज़रत फ़ारूके आज़म ऱदीअल्लाहु तआला अन्हों के खानदान से थे। हुज़ूर मोहसिने मिल्लत, खलीफा ए आला हज़रत मौलाना हामिद अली फारूकी साहब रहमतुल्लाह तआला अलैह के पोते थे। जिनकी मज़ारे पाक फतेशाह मार्केट रायपुर में मौजूद है। अब मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन बैजनाथपारा रायपुर में बाबा फारूकी साहब रहमतुल्लाह तआला अलैह की मज़ारे पाक तामीर की जाएगी जहां हर साल उनके मुरीदों और चाहने वालों का हुजूम नज़र आएगा। क्यों कि यह कोई आम शख्सियत नहीं थी बल्कि अपने वक्त के बड़े आलिमो में से एक थे। इन्होंने अपनी ज़िंदगी में कई वलियों जैसे हुज़ूर सरकारें कलां रहमतुल्लाह तआला अलैह, हुज़ूर ताजुश्शरिया रहमतुल्लाह तआला अलैह, हुज़ूर अमीने शरीयत रहमतुल्लाह तआला अलैह जैसी अज़ीम शख्सियतों के साथ अपना वक्त गुज़ारा था।

रूहानी दुनियां में भी उनकी काफी पकड़ मानी जाती थी। चाहे ताविज़ात के मामलात हो या फिर कश्फ के मामलात या फिर शादी न होने के मामलात सभी का इलाज आप कुरआनी आयतों से कर दिया करते थे। आपकी आदतों में एक आदत यह भी थी कि आप हमेशा गौस पाक की तोशा शरीफ की नियाज़ का एहतमाम किया करते थे। आपने कई साल तक कौम की खिदमत को अंजाम दिया। मदरसे में बच्चों को अच्छी से अच्छी दीनी तालीम की तरबियत देते रहे और आज उन्हें उसी मदरसे में दफ्न किया गया, ताकि उनका फ़ैजान हमेशा मदरसे पर बरसता रहे।




