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1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करे सरकार- कांग्रेस

1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करे सरकार- कांग्रेस

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हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। 1 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन शुरू करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ अन्नदाता किसानों का प्रदेश है, धान का कटोरा कहा जाता है, यहां पर धान खरीदी की तैयारी बहुत बृहद पैमाने पर की जाती है। लेकिन इस सरकार में अब तक सहकारिता, मार्फेड और नान में आपसी समन्वय नही बन पाया है, यह सरकार धान खरीदी की तैयारी को लेकर गंभीर नही है। संग्रहण शुरू करने से 3 महीना पहले ही खरीफ सीजन के लिए उपार्जन के तय लक्ष्य के आधार पर आवश्यक बारदानो का अनुमान, उसके खरीदी की व्यवस्था, भुगतान के लिये सरकार की गारेंटी पर धनराशि की व्यवस्था, हमाली, परिवहन, मिलिंग, धान खरीदी फड़ और उपार्जन केंद्रों में चबूतरो की मरम्मत, शेड की रिपेयरिंग, तिरपाल, सुतली, तौलाई मशीन, मॉश्चर मशीन की समुचित व्यवस्था करनी पड़ती है, लेकिन यह सरकार अब तक सोई हुई है। अर्ली वैरायटी के हरहुना धान पक कर कटाई के लिए तैयार है, लेट वैरायटी के माई धान भी दिवाली के तुरंत बाद कटाई शुरू हो जाएगी, अक्टूबर के अंत तक किसानों का पुरा धान कटाई संपन्न हो जाएगा। मौसम लगातार खराब चल रहा हैं, किसानों के पास अपने फसल को बचाने के लिए खलियान और कोठानों में स्थान सीमित होते हैं। अन्नदाता किसानों के 12 महीने के खर्चे का आसरा और कुल कमाई यही है, अपने परिश्रम से उपजाए अन्य को सुरक्षित रख पाना आसान नहीं होता अतः सरकार 1 नवंबर से ही धान खरीदी आरंभ करे।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार की किसान विरोधी निर्णयों से किसान चिंतित हैं। पहले बीज और खाद की कमी, फिर डीएपी और यूरिया की कालाबाजारी, खाद सब्सिडी में कटौती के चलते छत्तीसगढ़ में में इस बार अभूतपूर्व उर्वरक संकट से किसानों को जूझना पड़ा है, जिसका सीधा असर उत्पादकता पर पड़ रही है। अब जब फसल तैयार हो गई तो खरीदी 15 दिन बाद करने के तुगलकी फैसले से किसानों को अपनी उपज बचाने की चिंता सता रही है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार की अकर्मण्यता से एम एस पी पर धान उपार्जन की व्यवस्था पर संशय की स्थिति है। न भुगतान के लिए फंड की व्यवस्था है, न किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो पाई है। पिछले साल 27 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था, सरकार के दावे के अनुसार ही इस बार अभी तक मात्र 21 लाख किसानों का पंजीयन हुआ है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पिछले साल पंजीकृत कृषकों में से ही लगभग 6 लाख किसानों का पंजीयन शेष है। बटवारा, खरीदी बिक्री, फौत नामांतरण के कारण हर साल औसतन 2 से 3 लाख नए पंजीयन होते हैं, इस आधार पर छत्तीसगढ़ में लगभग 9 लाख किसान अब तक पंजीयन से वंचित हैं। एग्रीटेक पोर्टल में आ रही परेशानियों और त्रुटियों को अब तक दूर नही किया गया है। खराब मौसम के कारण खलिहानों में पानी भरा हुआ है, ऐसे में 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू नहीं करने में किसानों को बड़ा नुकसान होगा। सरकार हठधर्मिता छोड़ कर परंपरा के अनुरूप 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करे सरकार।

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