March 8, 2026

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स्वतंत्रता दिवस पर सौगात? 15 अगस्त 2025 से IMPS अर्थात ऑनलाइन पैसा भेजने पर चार्ज वसूल कर जनता के जेब में डकैती का फ़रमान…

स्वतंत्रता दिवस पर सौगात? 15 अगस्त 2025 से IMPS अर्थात ऑनलाइन पैसा भेजने पर चार्ज वसूल कर जनता के जेब में डकैती का फ़रमान…

डिजिटल इंडिया का दावा लूट है या धोखा? पहले ऑनलाइन भुगतान का प्रचार किए, अब उस पर भी वसूली?

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पीएनबी, केनरा बैंक सहित राष्ट्रीयकृत बैंकों के द्वारा 15 अगस्त 2025 से IMPS अर्थात ऑनलाइन पैसा भेजने पर चार्ज वसूलने के फैसले को जनता के जेब में डकैती करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पहले ऑनलाइन भुगतान का प्रचार किए, डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित किए, अब उस पर भी वसूली? 25 हजार से अधिक रकम के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर चार्ज और जीएसटी वसूली, आजादी के 79 वें वर्षगांठ के अवसर पर लागू किया जा रहा है, क्या यही स्वतंत्रता दिवस का उपहार है? मोदी सरकार को बताना चाहिए कि उनका डिजिटल इंडिया का दावा लूट का षडयंत्र है या आम जनता से धोखा?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पब्लिक सैक्टर के बैंकों के द्वारा तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) चार्ज और ऊपर से उस चार्ज पर जीएसटी लगाने का ऐलान मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करने वाले देश के करोड़ों खातेधारकों के साथ अन्याय है, अत्याचार है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा जारी आदेश के अनुसार 5 अलग-अलग स्लैब तय किए गए हैं। 25 हजार से 1 लाख तक के प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर अब खातेदारकों से 2 रुपए और उस पर जीएसटी, 1 लाख से 2 लाख के ट्रांजेक्शन पर 6 रुपए और जीएसटी, 2 लाख से 5 लाख के ट्रांजेक्शन पर 10 रुपए और जीएसटी तथा 5 लाख से अधिक के ट्रांजेक्शन पर 20 रुपए तथा उस पर जीएसटी वसूला जाएगा। इसी तरह का आदेश पीएनबी और केनरा बैंक के द्वारा भी जारी किया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मोदी सरकार में बैंकों को आम जनता के जेब पर डकैती डालने की खुली छूट है, केंद्र की मोदी सरकार, वित्त विभाग और आरबीआई के अनुचित संरक्षण में बैंक, खाताधारकों को लूटने नए-नए तरीके अपना रही है। सुविधा का झांसा देकर अनाप-शनाप सेवा शुल्क ग्राहकों से वसूला जा रहा है। जिस एसएमएस के लिए 10 से 15 रुपए साल का लिया जाता था, उसे बढ़कर अलग-अलग बैंकों में 50 से लेकर 200 रुपए प्रति तिमाही तक वसूले जा रहे हैं, एटीएम, डीडी और डुप्लीकेट पिन, मशीन से कैश डिपाजिट, नगद आहरण का शुल्क 10 गुना तक बढ़ चुका है। लाकर चार्ज जो 200 से 500 रुपए प्रतिवर्ष हुआ करता था, उसके लिए 2 हजार से 10 हजार तक वसूले जा रहे हैं। चेक बुक जो पहले खातेधारकों को बैंक से निःशुल्क उपलब्ध होता था, सभी बैंक उसकी भी कीमत ग्राहकों से ले रहे है। एक तो लगभग सभी राष्ट्रीकृत बैंकों में कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के कारण कार्य क्षमता घट गई है, हर काम के लिए लंबी लंबी लाइने लगानी पड़ती है, उसके बाद अब अपना ही पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करने पर चार्ज तथा उसके ऊपर जीएसटी वसूल करना आखिर कहां तक उचित है?

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