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आयुष्मान स्वास्थ्य योजना की क्लेम प्रोसेसिंग बंद, करोड़ों का भुगतान बकाया…

आयुष्मान स्वास्थ्य योजना की क्लेम प्रोसेसिंग बंद, करोड़ों का भुगतान बकाया…

सरकारी अस्पतालों में जांच इलाज़ और दवा नहीं, भुगतान नहीं होने से निजी अस्पताल भी संकट में।
सरकार की अकर्मण्यता और दुर्भावना से जनता निजी अस्पतालों में इलाज से वंचित।

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजनाएं के अंतर्गत निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान और क्लेम प्रोसेसिंग बंद होने को भाजपा सरकार की दुर्भावना करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार ने स्टेट नोडल एजेंसी द्वारा फरवरी 2025 से क्लेम प्रोसेसिंग बंद करा दिया है, जिसके चलते निजी अस्पतालों के भुगतान अटक गए हैं। 30 मार्च 2025 को टीपीए का अनुबंध भी खत्म हो चुका है, इस सरकार की अकर्मण्यता के चलते नई टीपीए कंपनी के अनुबंध की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। बकाया भुगतान नहीं मिलने से अनेकों निजी अस्पतालों में तालाबंदी की नौबत आ गई है। कई बड़े अस्पताल आयुष्मान कार्ड से मरीजों को बिना इलाज के लिए लौटाने लगे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मोटे कमीशन के लालच में सरकार जिद पर अड़ी है, इसलिए सहमति नहीं बन पा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य स्टेट नोडल एजेंसी द्वारा क्लेम और पेमेंट प्रोसेसिंग कार्य हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी, लेकिन स्टेट नोडल एजेंसी द्वारा लगाई जा रही टेंडर शर्तों से कोई भी कंपनी सहमत नहीं होने से कोई भी कंपनी ने इस टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित तिथि में भाग नहीं लिया था फिर भी टेंडर प्रक्रिया को ना ही निरस्त किया गया और ना ही शर्तों में सुधार किया गया है। उन्ही शर्तों पर फिर से टेंडर प्रक्रिया किए जाने को दबावपूर्ण तरीके से सफल बनाने में प्रयास किए जा रहे हैं। ज्ञात हो कंपनी को स्टेट नोडल एजेंसी के स्वास्थ्य संचालनालय में ऑफिस बनाकर क्लेम प्रोसेस करने की शर्त रखी गई है। इच्छुक कंपनी के अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि स्टेट नोडल एजेंसी के कार्यालय में क्लेम प्रोसेसिंग का कार्य करने से स्टेट नोडल एजेंसी अधिकारियों का दखल बढ़ जाएगा और इसकी निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पिछले डेढ़ वर्ष से क्लेम प्रोसेसिंग का काम ग्रामीण चिकित्सा बॉन्ड में अनुबंधित एमबीबीएस डॉक्टर्स से कराया गया था जबकि स्वयं सरकार के बॉन्ड पोस्टिंग तहत उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देनी थी, इन एमबीबीएस चिकित्सकों को क्लेम प्रोसेसिंग में विशेषज्ञता हासिल नहीं होती है और ना ही वे स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट मरीजों की रोग और इलाज की हिस्ट्री और प्रक्रिया को अच्छे से समझ पाते हैं। कथित रूप से स्टेट नोडल एजेंसी के अधिकारियों के अपरोक्ष निर्देश के अनुसार बड़ी संख्या में पेमेंट रिजेक्ट किए गए जिससे सरकार की आयुष्मान योजना में भारी भरकम देनदारी को दुर्भावनापूर्वक कम से कम करने के लिए बड़ी संख्या में रिजेक्ट किए गए। क्लेम को पाने के लिए राज्य भर के अस्पताल संचालक डेढ़ साल बाद भी राज्य नोडल एजेंसी के नया रायपुर दफ्तर में चक्कर काट रहे हैं, ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि जिला और राज्य स्तर की शिकायत निवारण समिति की सभी पीड़ित अस्पतालों की तार्किक सही इलाज करने वाली सभी केस रिपोर्ट्स को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। क्लेम प्रोसेसिंग करने वाली इंश्योरेंस कंपनियां प्रमुख रूप से राज्य में बड़े और सत्ताधारी दल के चहेते अस्पतालों के क्लेम पेमेंट प्रोसेसिंग को प्राथमिकता देने के स्टेट नोडल एजेंसी के अनधिकृत दखल से रुष्ट हैं। सुचारू रूप से चल रही योजना में विधिवत जारी किए गए क्लेम प्रोसेस को गाइड लाइन के नियम विरुद्ध रिजेक्ट और पैकेज से तय पेमेंट काट लेने के मामले अप्रत्याशित रूप से बढ़ गए हैं। थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) का टेंडर 23 जून 2025 को खोला जाना था, लेकिन केवल दो कंपनियों के भाग लेने के कारण अब टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ा दिया गया है। सरकार की दुर्भावना और बदइंतजामी के चलते आम जनता इलाज से वंचित हो रही है। अस्पतालों के वित्तीय स्थिति से चरमरा गई है।

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