मिनरल नीलामी रोड शो संसाधनों की लूट की गति बढ़ाने और बांकी बचे खनिजों को लुटाने की कवायद…
छत्तीसगढ़ के संसाधनों की सरेआम लूट, ’मित्रों’ को फायदा पहुंचाने कोयला खदानों को कौड़ियों के भाव बेच रहे।
हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। नवा रायपुर में आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी के रोड शो को चंद पूंजीपतियों के दबाव में छत्तीसगढ़ के संसाधनों की लूट की गति बढ़ाने और बांकी बचे खनिजों को लुटाने की कवायद करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र व राज्य सरकारें क्रिटिकल खनिजों जैसे लिथियम, नीकल, क्रोमियम, ग्रेफाइट आदि की खुली नीलामी के नाम पर बड़े निजी और कॉरपोरेट मित्रों को फायदा पहुँचाने का षडयंत्र कर रही हैं। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा बिना चर्चा के संसद में हाल ही में पारित एमएमडीआर (MMDR) संशोधन अधिनियम के जरिए राज्यों के खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर, सेस या लेवी लगाने के अधिकार सीमित किए गए हैं, नीलामी का रोड शो उन्हीं कॉर्पाेरेट परस्त नीतियों का हिस्सा है, इससे छत्तीसगढ़ जैसे समृद्ध राज्य के राजस्व को भारी नुकसान होगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार का कमर्शियल माइनिंग का फैसला ही देश और देश के सरकारी नवरत्न खनन कंपनियों के आर्थिक हितों के खिलाफ है। सरकारी नवरत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड के द्वारा जारी ’कोल विजन 2030’ रिपोर्ट और कॉमर्शियल माइनिंग के सरकारी आकड़े इस सरकार के क्रोनी कैपिटलिज्म का सबसे बड़ा उदाहरण है। केंद्र की मोदी सरकार ने तमनार (रायगढ़) की जमीन, जंगलों और जल-जंगल-जमीन पर निर्भर आदिवासियों के अधिकारों को कुचलकर कॉर्पाेरेट मुनाफे को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2015 में जब पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई थी, तब गारे पेल्मा IV/1 और IV/7 खदानों के लिए 1,585 रू. से 2,619 रू. प्रति टन तक की बोलियां प्राप्त हुई थीं। लेकिन साल 2020 में, जब पूरा देश कोविड-19 महामारी के संकट से जूझ रहा था, तब सरकार ने आपदा को अपने कॉर्पोरेट ’मित्रों’ के लिए ’अवसर’ में बदलते हुए नीतियों में अचानक बदलाव किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि नीलामी के मापदंडों को इस तरह बदला गया कि यह खदानें महज़ 342.25 प्रति टन की प्रभावी दर पर-यानी करीब 78 प्रतिशत की भारी छूट के साथकृजिंदल समूह की झोली में डाल दिया गया। 24,065 करोड़ का राजस्व अंतर छत्तीसगढ़ की जनता के साथ सरासर धोखा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि केवल गारे पेलमा के दो खदानों में ही प्रदेश के राजस्व को 24 हजार करोड़ से अधिक की क्षति पहुंचाई गई है। बाजार दरों और इस कौड़ियों के भाव की गई नीलामियों के कारण छत्तीसगढ़ राज्य को संभावित रूप से 24,065 करोड़ के विशाल राजस्व से हाथ धोना पड़ेगा। यह 24,065 करोड़ छत्तीसगढ़ के आदिवासियों, किसानों, युवाओं के विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं में खर्च हो सकते थे, जिन्हें सीधा कॉर्पाेरेट मुनाफे में बदल दिया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में स्थित अत्यंत समृद्ध ’गारे पेल्मा IV/1’ और ’IV/7’ कोयला खदानों की नीलामी केवल एक सामान्य व्यावसायिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार द्वारा भारत के सार्वजनिक संसाधनों की खुली लूट का एक जीता-जागता उदाहरण है। कांग्रेस इस नीतिगत घोटाले और राज्य के संसाधनों की कॉर्पाेरेट बिकवाली के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराती है। रायगढ़ का तमनार क्षेत्र आज गंभीर पर्यावरणीय विनाश और स्थानीय आदिवासियों के तीव्र विरोध का सामना कर रहा है। बिना ग्राम सभाओं की सहमति के और पर्यावरण मानकों की अनदेखी करके हो रहे इस खनन से जल, जंगल और जमीन तबाह हो रहे हैं। जिंदल समूह का इस मामले में हालिया ’यू-टर्न’ यह साबित करता है कि जब जनता का दबाव बढ़ता है और अनियमितताएं उजागर होती हैं, तो कॉरपोरेट तंत्र अपनी जवाबदेही से भागने का प्रयास करता है। कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि गारे पेल्मा IV/1 और IV/7 कोयला खदानों की 2020 की नीलामी प्रक्रिया की सर्वाेच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए। राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने वाली और जनहित के खिलाफ की गई इस नीलामी को तुरंत रद्द किया जाए। तमनार में ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों को बहाल किया जाए और पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई हो। कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।



