संभल सीओ के बयान पर पूरे देश में आलोचना के बीच अब इलाहाबाद हाई कोर्ट से भी फटकार…
‘इस्तीफा दें या तबादला करवा लें’, नमाज को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल जिला प्रशासन को फटकारा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नमाज को लेकर संभल जिला प्रशासन को फटकार लगाई है। शनिवार को एक याचिकाकर्ता की याचिका पर कोर्ट सुनवाई कर रहा था।
हरियर एक्सप्रेस, संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में तैनात सीओ कुलदीप कुमार का बयान अभी चर्चा में बना ही हुआ है, पूरे भारत में उनकी आलोचना हो ही रही है, इसी बीच स्थानीय प्रशासन के एक फैसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती है। अगर अधिकारी कानून व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें या तबादला करवा लें। यह टिप्पणी कोर्ट ने संभल में रमजान के दौरान नमाज रोके जाने के मामले में की।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे। यदि स्थानीय अधिकारियों और अफसरों को लगता है कि कानून-व्यवस्था की ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिसके कारण वे परिसर के अंदर पूजा करने वालों की संख्या सीमित करना चाहते हैं, तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से कहीं और तबादला करवा लेना चाहिए। राज्य का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर सके।
20 नमाजियों को दी गई है अनुमति…
शनिवार को याचिकाकर्ता मुनाजिर खान की ओर से दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसे गाटा संख्या-291 पर रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। उसके वकील ने कहा कि यहां एक मस्जिद स्थित है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गाटा संख्या-291 राजस्व रिकॉर्ड में यह मोहन सिंह और भूरज सिंह के नाम पर दर्ज है। यहां पर केवल 20 नमाजियों को अनुमति दी गई है।
याचिकाकर्ता और राज्य सरकार ने दिए तर्क…
याचिकाकर्ता ने बताया कि परिसर के अंदर नमाज अदा करने के लिए इससे कहीं ज्यादा लोग आ सकते हैं, क्योंकि अभी रमजान का महीना चल रहा है। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि कानून व्यवस्था को देखते हुए नमाजियों की संख्या को सीमित करने वाला ऐसा आदेश परित किया गया है।



