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साफ हवा, हरित पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सतत प्रयास — सांसद बृजमोहन अग्रवाल

साफ हवा, हरित पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सतत प्रयास — सांसद बृजमोहन अग्रवाल

पर्यावरण संरक्षण को लेकर संसद में बृजमोहन की सक्रियता, ग्रीन क्रेडिट योजना से छत्तीसगढ़ को मिलेगा लाभ।

हरित विकास की दिशा में बड़ा कदम, बृजमोहन के सवाल पर केंद्र ने दी ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम की जानकारी।

हरियर एक्सप्रेस, नई दिल्ली/रायपुर। स्वच्छ पर्यावरण, शुद्ध हवा और प्रकृति के संरक्षण को लेकर रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री बृजमोहन अग्रवाल लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देने के लिए पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इसी क्रम में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को लोकसभा में ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) के अंतर्गत पर्यावरण को और बेहतर करने के लिए कार्बन को कम करने वाले पौधों को लगाने का मुद्दा उठाया।

श्री अग्रवाल के प्रश्न के जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और वन पुनर्स्थापन को बढ़ावा देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में अवक्रमित वन क्षेत्रों का चयन किया गया है।

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) में समूचे देश में 4391 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जा रहा है। प्रोग्राम में छत्तीसगढ़ में 536 हेक्टेयर भूमि में वन उगाये जा रहे हैं। गुजरात में सबसे ज्यादा 975 हेक्टेयर भूमि में और मध्यप्रदेश में 640 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्बन को कम करने वाले पौधों को लगाया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि कार्बन को कम करने वाले पौधों की दीर्घकाल तक जीवित रहने की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे इलाके के 40% कैनोपी घनत्व पर बाकायदा ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) के अंतर्गत स्थापित पारिस्थितिक लक्षण को प्राप्त करने के लिए विभिन्न क्रेडिट कार्ड भी जारी किए जाते हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है। ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के माध्यम से वृक्षारोपण और वन पुनर्स्थापन के कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वातावरण में हरियाली बढ़ेगी और लोगों को स्वच्छ व शुद्ध हवा मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से सरकारी और निजी संस्थाओं की भागीदारी से पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम से न केवल वन क्षेत्रों का संरक्षण होगा बल्कि कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी, जल स्रोतों का संरक्षण होगा और स्थानीय समुदायों को भी रोजगार व आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा कि उनका निरंतर प्रयास रहेगा कि रायपुर लोकसभा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़े विषयों को संसद में मजबूती से उठाया जाए, ताकि प्रदेश को केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।

बता दें कि, केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 12 अक्टूबर 2023 को ग्रीन क्रेडिट नियम लागू किया था। जिसका उद्देश्य स्वैच्छिक आधार पर पर्यावरण के अनुकूल कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना है।

ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण और अवक्रमित वन भूमि के पारिस्थितिक पुनर्स्थापना की प्रक्रिया का भी विकास किया जाता है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत प्रशासक है और इन नियमों के तहत ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के प्रबंधन, संचालन और जारी करने सहित इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अन्य उत्तरदायी भी है। ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) के लिए वन भूमियों पर किए जाने वृक्षारोपण कार्यों की उपयोगिता के आधार पर स्थानीय प्रजातियों के मिश्रण का उपयोग करना आवश्यक है। ताकि परिस्थितियों के अनुकूल वृक्षों के जरिए पर्यावरण का बेहतर संरक्षण किया जा सके। ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) में आवेदक को ग्रीन क्रेडिट तभी प्राप्त हो सकते हैं जब कम से कम 5 वर्षों का पुनर्स्थापना कार्य पूरा हो चुका हो और कम से कम 40% का कैनोपी घनत्व प्राप्त हो गया हो मतलब सिर्फ 40 फ़ीसदी क्षेत्र में कार्बन को कम करने वाले पौधों का विकास किया गया हो। साथ ही आरोपित पौधों और प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों को परिपक्व होने के लिए 5 वर्ष की स्थापना अवधि निर्धारित की गई।

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