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लोकसभा में गूँजी किसानों की आवाज़: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से माँगा फसलों की खरीद और भंडारण का पूरा हिसाब…

लोकसभा में गूँजी किसानों की आवाज़: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से माँगा फसलों की खरीद और भंडारण का पूरा हिसाब…

किसानों के हितों के लिए संसद में प्रखर हुए बृजमोहन अग्रवाल, FCI की खरीद व्यवस्था और भंडारण क्षमता पर मांगा जवाब।

धान खरीदी से लेकर भंडारण व्यवस्था तक, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में उठाए किसानों से जुड़े अहम सवाल।

हरियर एक्सप्रेस, नई दिल्ली/रायपुर। सांसद एवं भारतीय खाद्य निगम छत्तीसगढ़ राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष श्री बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों के हितों को लेकर प्रखरता से आवाज़ उठाई है।

श्री अग्रवाल ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा विभिन्न राज्यों से की जाने वाली फसलों की खरीद, विगत वर्षों में खरीदी गई फसलों की मात्रा और खर्च, अनाज परिवहन व्यवस्था, गोदामों की क्षमता तथा छत्तीसगढ़ के लिए खाद्यान्न आवंटन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया कि किसानों से होने वाली फसलों की खरीद व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने अनाज के भंडारण और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने, रेलवे के माध्यम से बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था विकसित करने तथा राज्यों में गोदामों की क्षमता बढ़ाने जैसे विषयों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

सांसद अग्रवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने जानकारी दी कि 1 फरवरी 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 470.67 लाख टन की विशाल भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसमें 147.20 लाख टन क्षमता एफसीआई की अपनी है, जबकि 323.47 लाख टन क्षमता किराए पर ली गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य एजेंसियों के पास भी 381.92 लाख टन की क्षमता सुरक्षित है।

वहीं छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) हेतु राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत कुल 1153.380 हजार टन चावल आवंटित किया गया है। श्री अग्रवाल ने पिछले पाँच वर्षों में छत्तीसगढ़ से हुई धान की रिकॉर्ड खरीद और उस पर खर्च की गई करोड़ों की राशि का ब्यौरा भी सदन के पटल पर रखवाया।

छत्तीसगढ़ में FCI और राज्य एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान का मूल्य वर्ष 2020-21 के ₹13,419.90 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹27,009.44 करोड़ के आश्चर्यजनक आंकड़े तक पहुँच गया है। यह आधे दशक में मूल्य में लगभग 102% की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि के दौरान खरीद की मात्रा 71.08 LMT से बढ़कर 116.42 LMT हो गई है। उल्लेखनीय है कि जहाँ FCI राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी सहित विभिन्न फसलों की खरीद करता है, वहीं छत्तीसगढ़ में धान मुख्य फोकस वाली फसल बनी हुई है, जो राज्य की संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था का आधार है।

श्री बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, “राष्ट्रीय खाद्य भंडार में छत्तीसगढ़ का योगदान न केवल गर्व का विषय है, बल्कि हमारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का एक स्तंभ भी है। अपने किसानों के लिए खरीद मूल्य को दोगुना करके और IT-समर्थित अनुकूलन मॉडल लागू करके, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारी मिट्टी में उपजा हर दाना कुशलतापूर्वक अपने उद्देश्य को पूरा करे। हमारा ध्यान लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर करने और राज्य समिति के सदस्यों द्वारा गोदामों के नियमित ऑन-साइट निरीक्षण के माध्यम से भंडारित गुणवत्ता में सुधार करने पर है।”

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार से खाद्यान्नों की सुरक्षित आवाजाही और गोदामों की कमी पर भी सवाल पूछे। जिसके जवाब में सरकार ने बताया कि खाद्यान्नों के सुचारू संचलन के लिए रेल मार्ग का 80% से अधिक उपयोग किया जा रहा है और ‘मार्ग अनुकूलन अध्ययन’ के लिए आईआईटी दिल्ली की सेवाएं ली गई हैं।

I IT दिल्ली के FITT (फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी के तहत एक अत्याधुनिक रूट ऑप्टिमाइजेशन’ अध्ययन शुरू किया गया है। रेलवे के FOIS पोर्टल के साथ एकीकृत यह डिजिटल दैनिक रेक योजना टूल, FCI को पॉइंट-टू-पॉइंट माल ढुलाई गणना को स्वचालित करने की अनुमति देता है। इस टूल का कार्यान्वयन फरवरी 2025 में शुरू हुआ, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि छत्तीसगढ़ का अनाज न्यूनतम लागत और अधिकतम गति के साथ कमी वाले क्षेत्रों तक पहुँचे।

छत्तीसगढ़ में कुल भंडारण क्षमता 32.41 LMT है (जिसमें FCI के तहत 21.15 LMT और राज्य एजेंसियों के पास 11.26 LMT शामिल है)। इसे और अधिक आधुनिक बनाने के लिए, सरकार परियोजना प्रबंधन सेवाओं (PMS) की आवश्यकता के बिना मौजूदा बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने हेतु ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना (Asset Monetization Scheme) का उपयोग कर रही है। राज्य में इस दक्षता अभियान के लिए पहचाने गए प्रमुख स्थलों में FSD दुर्ग और FSD अर्जुन शामिल हैं।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुदृढ़ करने और बफर स्टॉक बनाए रखने के लिए सरकार निरंतर भंडारण क्षमता की निगरानी कर रही है। श्री अग्रवाल के इन प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ है कि किसानों द्वारा उपजाया गया एक-एक दाना सुरक्षित रहे और गरीब जनता तक समय पर राशन पहुँच सके।

सांसद अग्रवाल ने सदन में यह मुद्दा उठाकर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के किसानों को यह भरोसा दिलाया है कि उनकी मेहनत की उपज का संरक्षण और वितरण मोदी सरकार की प्राथमिकता है।

श्री अग्रवाल की सक्रियता का ही परिणाम है कि सरकार ने देश भर में भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का विवरण साझा किया।

सरकार ने जानकारी दी कि देश में कुशल भंडारण प्रणाली विकसित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं:

पीईजी योजना: निजी निवेश के माध्यम से 24 राज्यों में पारंपरिक गोदामों का निर्माण किया गया है, जिसके तहत 148.61 लाख टन क्षमता का निर्माण पूरा हो चुका है।

खुले भंडारण की समाप्ति: पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में अनाज को खुले में सड़ने से बचाने के लिए ‘सीएपी चरणबद्ध समाप्ति’ योजना के तहत 90 लाख टन की नई क्षमता पर काम चल रहा है।

आधुनिक तकनीक: देश में पीपीपी मॉडल के तहत साइलो (Silos) का निर्माण, केंद्रीय क्षेत्र योजना (2017-25) और परिसंपत्ति मुद्रीकरण जैसे माध्यमों से भंडारण क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है।

आधुनिक भंडारण के लिए पीपीपी मोड के तहत 57 स्थानों पर 32.25 लाख टन क्षमता वाले साइलो का निर्माण पूरा हो चुका है।

भंडारण की कमी को दूर करने के लिए निजी उद्यमी गारंटी (PEG) योजना और परिसंपत्ति मुद्रीकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं।

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