चांद दिखने के बाद रबी उल अव्वल का आगाज़, 5 सितंबर को है ईद मिलादुन्नबी – हाजी रफीक अहमद

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। चांद कमेटियों ने ऐलान किया है कि इतवार को रबी उल अव्वल का चांद नज़र आ गया है। ऐसे में अब रबी उल अव्वल की पहली तारीख सोमवार (25 अगस्त) को होगी। चांद की पुष्टि होने के बाद बाजारों में रौनक बढ़ गई है और मुस्लिम मोहल्लों में ईद ए मिलाद की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
चांद कमेटियों के इस ऐलान के मुताबिक, इस्लाम धर्म के पवित्र और ऐतिहासिक अवसर मिलाद उन नबी (ईद ए मिलाद) की तारीख भी तय हो गई है। यह खास दिन अब 5 सितंबर 2025 (जुमा) को मनाया जाएगा। ईद मिलाद उन नबी का इस्लाम में खासकर भारत में खास महत्व है। शिया और सुन्नी दोनों समुदायों की चांद कमेटियों की ओर से एक ही तारीख का ऐलान किए जाने से लोगों में स्पष्टता और सहमति बनी है।
राजधानी के सीनियर सिटीजन एवं सर्वधर्म छत्तीसगढ़िया सेवा संघ के संस्थापक एवं संयोजक हाजी रफीक अहमद खान (स्नातकोत्तर, दर्शन शास्त्र) ने हरियर एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि मीलाद उन नबी को आखिरी नबी पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक होता है। हर साल इस मौके पर विशेष जुलूस और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबीउल अव्वल शुरू हो चुका है। मुसलमानों के लिए यह महीना बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी महीने में पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म हुआ था। इस महीने को दुनिया भर के मुसलमान अकीदत और मोहब्बत के साथ याद करते हैं। रबीउल अव्वल की 12वीं तारीख को पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्मदिन मनाया जाता है। इसी दिन को ईद मिलादुन्नबी या ईद ए मिलाद के नाम से पूरी दुनिया में मुसलमान मनाते हैं।
हाजी रफीक अहमद खान ने बताया कि ईद ए मिलाद के मौके पर मस्जिदों और घरों में सजावट की जाती है। जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं और पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत (जीवन-चरित्र) पर रौशनी डाली जाती है। इस दिन कुरआन की तिलावत की जाती है और दरूद-ओ-सलाम पेश किया जाता है।

उन्होंने रायपुर शहर के जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोगों से खास कर नवजवानों से यह अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग वक्त का खास खयाल रखे और अलग अलग इलाकों से साधारण तरीके से बैजनाथपारा पहुंचे और यहां से ही जुलूस में शामिल हो। इस जुलूस ए मोहम्मदी में डीजे और आतिशबाजियां बैन है इसका खास खयाल रखे और जुलूस को कामयाब बनाने के साथ साथ यह भी ध्यान रखे कि आपकी वजह से किसी भी मज़हब के लोगों को कोई भी परेशानी न हो यही हमारे पैगम्बर साहब का आदेश रहा है।
हाजी रफीक अहमद खान ने आगे कहा कि मुसलमान इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। कई जगहों पर खाना खिलाने और मिठाइयाँ बांटने का भी खास इंतजाम किया जाता है। ईद ए मिलाद का मकसद सिर्फ जश्न मनाना नहीं है, बल्कि पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीम, इंसाफ, मोहब्बत, रहमत और इंसानियत को याद करना और उस पर अमल करना भी है।



