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राज्य स्थापना दिवस पर यामिनी स्टूडियो की सांस्कृतिक सौगात,विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल के करकमलों से लोकगीत ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ का भव्य लोकार्पण…

राज्य स्थापना दिवस पर यामिनी स्टूडियो की सांस्कृतिक सौगात,विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल के करकमलों से लोकगीत ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ का भव्य लोकार्पण…

‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ लोकगीत का विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने किया विमोचन।
यह केवल गीत नहीं, हमारी माटी और लोकसंस्कृति का गौरव है : विधायक डॉ संपत अग्रवाल
विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के करकमलों से गूंजा ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’, प्रदेशवासियों को दी राज्योत्सव की सांस्कृतिक सौगात।

हरियर एक्सप्रेस, बसना। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर पर प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक विरासत और माटी के प्रति अगाध प्रेम को समर्पित विशेष छत्तीसगढ़ी लोकगीत ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ का भव्य लोकार्पण बसना विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल के शुभ करकमलों द्वारा गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यामिनी स्टूडियो छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत यह गीत राज्योत्सव के दिन श्रोताओं के समक्ष जारी किया गया।

विमोचन करते हुए लोकप्रिय विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने पूरी निर्माण टीम को बधाई दी और कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन माटी, समृद्ध लोकसंस्कृति और जनभावनाओं को संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय एवं अभिनंदनीय है। राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर पर ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ जैसे भावपूर्ण गीत का विमोचन हम सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

विधायक डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा कि यह रचना केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारे खेत-खलिहान, सीधे-सादे ग्रामीण जीवन, पारंपरिक लोकनृत्यों और वाद्ययंत्रों की जीवंत अभिव्यक्ति है। आधुनिकता के इस दौर में यह गीत नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम बनेगा।

राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को सांस्कृतिक उपहार: विधायक डॉ. संपत अग्रवाल
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर इस लोकगीत का लोकार्पण प्रदेशवासियों के लिए एक अनमोल सांस्कृतिक उपहार है। यह प्रस्तुति अपनी माटी के प्रति अगाध प्रेम, आत्मगौरव और सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। विधायक डॉ. अग्रवाल ने विश्वास जताया कि अपनी मिठास और माटी की खुशबू के दम पर यह गीत जन-जन के दिलों में खास जगह बनाएगा तथा छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की समृद्ध विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

कलाकारों और रचनाकारों का उत्कृष्ट समन्वय…
इस लोकगीत में छत्तीसगढ़ के मंझे हुए कलाकारों, साहित्यकारों और तकनीशियनों की प्रतिभा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। गीत को दीपक कुमार साहू एवं प्रतिभा त्रिपाठी ने अपनी सुमधुर और भावपूर्ण आवाज से सजाया है, तो वहीं पर्दे पर गोरे बरिहा और सुषमा कैवर्त के जीवंत अभिनय ने इसके दृश्यों को बेहद प्रभावशाली बना दिया है। शिक्षक व साहित्यकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ के लिखे मर्मस्पर्शी बोलों को ताम्रध्वज केंवट ने अपने कर्णप्रिय संगीत संयोजन में पिरोया है। कमलेश कुमार साहू के निर्माण में तैयार इस पूरे प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय ऑडियो रिकॉर्डिंग स्वर म्यूजिक एकेडमी एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, भिलाई में संपन्न हुई है, जिससे गीत का हर पहलू तकनीकी और कलात्मक रूप से समृद्ध बन पड़ा है।

गीतकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ का साहित्यिक योगदान…
गीत के रचयिता शिक्षक प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ लंबे समय से शिक्षा और साहित्य जगत में सक्रिय हैं। बाल साहित्य, कविता और सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर निरंतर लेखनी चलाने वाले साव की रचनाओं में ग्रामीण जीवन, प्रकृति और सामाजिक सरोकार स्पष्ट झलकते हैं। इस गीत के जरिए उन्होंने अपनी जन्मभूमि के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।

गायिका प्रतिभा त्रिपाठी को दोहरी उपलब्धि…
इस लोकार्पण के साथ ही मुख्य गायिका प्रतिभा त्रिपाठी के लिए यह अवसर दोहरी खुशियों का संदेश लेकर आया। अपनी सुरीली गायिकी से पहचान बनाने वाली प्रतिभा त्रिपाठी का चयन ‘राज्य शिक्षक पुरस्कार (सत्र 2026-27)’ के लिए हुआ है। शिक्षा और कला दोनों क्षेत्रों में उनके इस उत्कृष्ट योगदान की विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल सहित सभी उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने सराहना की।

तकनीकी दल का रहा विशेष योगदान…
गीत के सफल निर्माण में अमर स्टूडियो गिरसा, तावसिफ जमाल (स्वर म्यूजिक एकेडमी, भिलाई), कोरियोग्राफर संदीप भारती, कैमरामैन रविकांत साहू, वीडियो एडिटर अभिजीत भारती तथा मेकअप टीम से गायत्री साहू, कल्पना चौहान, मिथिलेश साहू, परमानंद निषाद एवं दुर्गेश परघनिया की तकनीकी दक्षता का सराहनीय योगदान रहा।

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