October 24, 2026

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सोशल मीडिया रील्स और नशे की गिरफ्त में युवा: लड़कियां भी दिखा रही हैं चिंताजनक रवैया…

सोशल मीडिया रील्स और नशे की गिरफ्त में युवा: लड़कियां भी दिखा रही हैं चिंताजनक रवैया…

नवेद खान/हरियर एक्सप्रेस 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स बटोरने की होड़ में युवा कानून-व्यवस्था और सामाजिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। इस प्रवृत्ति में अब केवल लड़के ही नहीं, बल्कि युवतियां और महिलाएं भी बढ़-चढ़कर शामिल हो रही हैं, जो कि समाज के लिए एक गंभीर विषय बनता जा रहा है।

वायरल होने की अंधी दौड़…

आज के दौर में मनोरंजन और ऑनलाइन सनसनी बनने के लिए सड़कों और बार जैसी सार्वजनिक जगहों पर कानून को ताक पर रखना एक नया ट्रेंड बन गया है। हाल ही में बिलासपुर से एक ऐसा मामला सामने आया था जहां कुछ युवतियों ने पारंपरिक गरबा परिधान में एक प्रमोशनल वीडियो शूट किया। इस दौरान सिगरेट पीने, पिस्तौल जैसे हथियार लहराने और तेज रफ्तार में खतरनाक बाइक स्टंट करने का प्रदर्शन किया गया। वीडियो वायरल होने और धार्मिक-सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।

राजधानी से लेकर अन्य जिलों तक बढ़ी घटनाएं…

0 रायपुर का ‘बुलेट गर्ल’ मामला: इस साल जून में राजधानी रायपुर की सड़कों पर एक चलती बाइक पर युवती द्वारा बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक स्टंट करने का वीडियो सामने आया था, जो काफी चर्चा में रहा।

0 आपसी मारपीट और हुड़दंग: बिलासपुर के कुदुदंड पुल और रायपुर के रामनगर क्षेत्र से भी युवतियों के बीच आपसी झड़प और मारपीट के वीडियो वायरल हो चुके हैं। पुरानी रंजिश के चलते युवतियों द्वारा सार्वजनिक रूप से मारपीट करने की घटनाएं कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती हैं।

0 पुलिस से उलझना: मार्च के महीने में बिलासपुर में ही एक युवती का शराब के नशे में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों से बदसलूकी और हंगामा करने का मामला सामने आया था।

नुकसान युवाओं का अपना भविष्य…

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां किसी भी रूप में महिला सशक्तिकरण या समानता का प्रतीक नहीं हैं। जब युवा इस तरह के कृत्यों में संलिप्त होते हैं, तो कानून उनके साथ भी वही सख्ती बरतता है जो किसी भी अन्य उपद्रवी के साथ बरती जाती है। सार्वजनिक जगहों पर इस तरह का आचरण और अनुशासनहीनता अंततः युवाओं के अपने व्यक्तित्व का अवमूल्यन करती है और समाज में उन्हें उपहास का पात्र बनाती है।

यह समय की मांग है कि न केवल युवा स्वयं समझदारी का परिचय दें, बल्कि पूरा समाज मिलकर इस प्रकार की नकारात्मक संस्कृति और अराजकता को बढ़ावा देने वाली प्रवृत्तियों पर रोक लगाए।

पत्रकार नवेद खान की कलम से.🖊️

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