June 5, 2026

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उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबित करने का आदेश किया रद्द, नए सिरे से सुनवाई के निर्देश

उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबित करने का आदेश किया रद्द, नए सिरे से सुनवाई के निर्देश

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हरियर एक्सप्रेस, उन्नाव। उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने CBI की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट से कहा कि या तो सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए या फिर सजा निलंबन की अर्जी पर नया आदेश पारित किया जाए।

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले साल सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दे दी थी। इस फैसले के बाद व्यापक सार्वजनिक आक्रोश देखने को मिला था, जिसके बाद CBI सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

सुनवाई के दौरान सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि यह साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि कथित घटना के समय पीड़िता नाबालिग नहीं थी। वहीं, CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस तर्क का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने यह मानकर गलती की कि विधायक POCSO Act के तहत “लोक सेवक” की श्रेणी में नहीं आते।

जस्टिस बागची ने भी इस मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल से सहमति जताते हुए कहा, “हम हाईकोर्ट के इस अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण का समर्थन नहीं कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि POCSO कानून बच्चों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है और किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा अपराध को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट को मामले पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। CJI ने टिप्पणी की कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, इसलिए हाईकोर्ट मुख्य अपील की सुनवाई में संकोच कर सकता था।

CBI ने अपनी याचिका में कहा था कि हाईकोर्ट का फैसला POCSO Act की संरक्षणात्मक भावना को कमजोर करता है। एजेंसी ने तर्क दिया कि विधायक जैसे प्रभावशाली व्यक्ति को “लोक सेवक” की परिभाषा से बाहर रखना कानून के उद्देश्य के विपरीत है। CBI ने यह भी कहा कि लंबे समय तक जेल में रहना मात्र उम्रकैद की सजा निलंबित करने का आधार नहीं हो सकता, विशेषकर तब जब मामला नाबालिग से रेप जैसे जघन्य अपराध का हो।

CBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सेंगर की रिहाई से पीड़िता और गवाहों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है तथा इससे आपराधिक न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है।

गौरतलब है कि कुलदीप सेंगर को 2019 में उन्नाव रेप केस में विशेष CBI अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। पीड़िता और उसके परिवार ने सेंगर और उसके सहयोगियों पर लगातार धमकी और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

सेंगर फिलहाल पीड़िता के पिता की कथित हिरासत में मौत से जुड़े एक अन्य मामले में 10 साल की सजा भी काट रहा है। जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उस मामले में भी उसकी सजा निलंबन की दूसरी अर्जी खारिज कर दी थी।

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