June 6, 2026

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मोदी सरकार अपनी विफलता से ध्यान हटाने महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया – राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल

मोदी सरकार अपनी विफलता से ध्यान हटाने महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया – राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल

महिला आरक्षण बिल तो 2023 में पास हो चुका है।

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों तथा सरकार की विफलता से ध्यान हटाने भाजपा ने महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रही है। सिलेंडर की कमी, पेट्रोल, डीजल, खाद-बीज की कमी, खाद्य पदार्थों के दाम, बढ़ती महंगाई, एपस्टीन फाईल जैसे मुद्दों के कारण मोदी सरकार की साख गिर चुकी है। इसीलिए ये जनता का मूल समस्याओं से ध्यान हटाना चाह रहे।

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पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 128 वां संविधान संशोधन सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुकी है। भाजपा 2023 के आरक्षण बिल को क्यों लागू नहीं कर रही है? इस बिल के आधार पर तुरंत आरक्षण प्रभावी हो सकता है। भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी।

पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती सरकार? कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है।

पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा जो परिसीमन चाहती है उसमें छत्तीसगढ़ सहित छोटे राज्य जिनकी वर्तमान सदस्य संख्या कम है उनको नुकसान उठाना पड़ेगा। भाजपा अपनी राजनीतिक फायदे के हिसाब से परिसीमन चाह रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया? जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2034 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता। भाजपा की मंशा महिला आरक्षण की नहीं अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थी जो विपक्षी दलों की एकजुटता से पूरा नहीं हो चुका।

पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगरपालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। सीटों के परिसीमन का भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है।

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