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हाई कोर्ट ने DGP से मांगा शपथ पत्र, कोर्ट के निर्देश के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई करने में पुलिस रही नाकाम…

हाई कोर्ट ने DGP से मांगा शपथ पत्र, कोर्ट के निर्देश के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई करने में पुलिस रही नाकाम…

हरियर एक्सप्रेस, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के अभनपुर पुलिस ने गजब कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद भी मॉब लिचिंग के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। पीड़ितों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आपबीती बताई। नाराज कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को गंभीरता से लिया है। डिवीजन बेंच ने डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी से पूछा है, दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 28 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

छत्तीसगढ़ के अभनपुर थाना क्षेत्र में 13 मार्च 2025 को काला जादू करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीण तिलक साहू की पिटाई कर रहे थे। तिलक साहू ने इस बात की जानकारी अपने पिता अमर सिंह साहू को दी, पिता अमर सिंह अपने बेटे नरेश साहू के साथ तिलक के बीच बचाव के लिए गया। गुस्साए ग्रामीणों ने तिलक के साथ-साथ पिता और उसके भाई को बंधक बना लिया और तीनों की जमकर पिटाई कर दी। पिटाई करने के बाद मुंह में कालिख पोत दिया और अर्धनग्न हालत में गांव में घुमाया। तीनों को ग्रामीणों ने जूते की माला पहनाई और पूरी रात गांव की गुड़ी में बंधक बनाकर रखा।

दूसरे दिन पुलिस गांव पहुंची, थाने से गए पुलिस कर्मियों ने पीड़ितों से कोरे कागज पर दस्तखत करा लिया, कोरे कागज पर दस्तखत कराने के बाद पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों के खिलाफ किसी तरह की कोई शिकायत ना करने की बात लिख दी। गांव से तीनों पीड़ितों को अपने साथ ले गए और गांव के बाहर छोड़कर चले गए।

पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई ना करने पर पीड़ितों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में गुहार लगाई और घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। पीड़ितों ने यह भी बताया, पुलिस कर्मियों ने कोरे कागज पर उनका दस्तखत ले लिया था। कोरे कागज में पुलिस ने क्या लिखा है इसकी जानकारी उनको नहीं है।

मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को, दोषियों के खिलाफ टोनही प्रताड़ना अधिनियम एवं अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कार्रवाई करने निर्देश जारी किया। अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ जमानती धारा में अपराध पंजीबद्ध कर दिया। टोनही प्रताड़ना अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की।

न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद दोषियों के खिलाफ टोनही प्रताड़न अधिनियम व अन्य धाराओं के खिलाफ कार्रवाई ना करने व अदालती आदेश का अवहेलना करने का पुलिस पर आरोप लगाते हुए पीड़ितों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने डीजीपी, आईजी रायपुर रेंज व एसएसपी रायपुर को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया था।

बीते सुनवाई के दौरान डीजीपी ने शपथ पत्र के साथ जानकारी पेश करते हुए डिवीजन बेंच को बताया था, इस मामले में दोषी पाए गए मामले में दोषी तत्कालीन थाना प्रभारी अभनपुर सिद्धेश्वर प्रताप सिंह, सब इंस्पेक्टर नरसिंह साहू को चार्जशीट दिया गया है।

मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ताओं को इस पूरे मामले को ट्रायल कोर्ट में उठाने की छूट दी है। कोर्ट ने कहा, आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 309(6) और धारा 111(3), तथा छत्तीसगढ़ टोनाही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत अपराध बनता है। डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट को इस पर विचार करने और विधि अनुसार उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

डिवीजन बेंच ने कहा, इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है, इसे लेकर सुनवाई जारी रहेगी। डिवीजन बेंच ने दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभ की गई विभागीय जांच और की जाने वाली कार्रवाई के संंबंध में डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 की तिथि तय कर दी है।

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