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धोखे से पकड़ा गया, सरेंडर मेरी मर्जी से नहीं हुआ: हिड़मा के करीबी देवा बारसे का बयान

धोखे से पकड़ा गया, सरेंडर मेरी मर्जी से नहीं हुआ: हिड़मा के करीबी देवा बारसे का बयान

हैदराबाद। छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लंबे समय तक सक्रिय रहे कुख्यात नक्सली देवा बारसे ने अपने सरेंडर और कथित एनकाउंटर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हाल ही में 19 नक्सलियों के साथ हैदराबाद में आत्मसमर्पण करने वाले देवा बारसे ने दावा किया कि वह स्वेच्छा से सरेंडर करने बाहर नहीं आया था, बल्कि पुलिस ने उसे धोखे से पकड़कर आत्मसमर्पण करवाया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवा बारसे ने बताया कि वह 29 दिसंबर को संगठन के एक काम के सिलसिले में दो बोलेरो वाहनों से बाहर निकला था। इसी दौरान पुलिस ने चारों ओर से घेरकर उसे पकड़ लिया। इसके बाद करीब चार दिनों तक पूछताछ की गई और फिर उसे हैदराबाद लाया गया, जहां 3 जनवरी को आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी करवाई गई।

देवा बारसे ने हिड़मा के एनकाउंटर को लेकर भी बड़ा दावा किया। उसने कहा कि हिड़मा को पुलिस ने मारा है, न कि उसने। मनीष कुंजाम द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए देवा ने कहा कि 27 अक्टूबर तक उसका हिड़मा से संपर्क बना हुआ था। उसके मुताबिक हिड़मा विजयवाड़ा इलाज के लिए जा रहा था, इसी दौरान पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया।

देवा ने बताया कि वह 2003 में नक्सल संगठन में शामिल हुआ था, जबकि हिड़मा 1997 से संगठन में सक्रिय था। दोनों एक-दूसरे को भाई मानते थे। उसने कहा कि हिड़मा का एनकाउंटर फर्जी है और उस मामले में उस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं।

कर्रेगुट्टा ऑपरेशन का जिक्र करते हुए देवा ने कहा कि अप्रैल में वह वहां मौजूद था। उन्हें उम्मीद थी कि ऑपरेशन एक-दो दिन चलेगा, लेकिन इतना बड़ा अभियान चलेगा, इसका अंदाजा नहीं था। देवा का दावा है कि सुबह करीब साढ़े छह बजे हमला शुरू हुआ और वह पहाड़ी पर मौजूद था, जहां से उसने संगठन के बड़े नेताओं को अलग-अलग इलाकों में सुरक्षित निकाला। उसके अनुसार उस पहाड़ी पर संगठन का कोई सदस्य नहीं मारा गया, जबकि पुलिस ने 36 साथियों को मारने का दावा किया।

देवा ने यह भी कहा कि संगठन को विदेशों से हथियार नहीं मिलते थे। उसके मुताबिक इजराइली ‘तावोर’ और अमेरिकी कॉल्ट M4 जैसे हथियार सुरक्षा बलों के पास होते हैं और संगठन के पास मौजूद कई हथियार लूटे हुए थे। उसने बताया कि PLGA बटालियन में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही भर्ती किया जाता था और जबरन भर्ती नहीं की जाती थी।

देवा ने कहा कि वह अपनी बटालियन या संगठन के लिए कोई संदेश नहीं देना चाहता। समाज और जनता को लेकर भी फिलहाल उसके पास कहने के लिए कुछ नहीं है।

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