March 9, 2026

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मुफ्त बिजली का दावा झूठा, जीरो कार्बन उत्सर्जन केवल कागजी…

मुफ्त बिजली का दावा झूठा, जीरो कार्बन उत्सर्जन केवल कागजी…

प्रदूषण की चिंता है तो हसदेव की कटाई और अडानी को दिए जा रहे नए कोल ब्लॉक तत्काल निरस्त करें सरकार।

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। सौर ऊर्जा जागरूकता अभियान एवं प्रोत्साहन समारोह के आयोजन को भाजपा सरकार का राजनैतिक इवेंट करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत हर घर मुफ्त बिजली का दावा झूठा है। घरों में सौर पैनल लगाकर बिजली बनाने की योजना के लिए सरकार ने जो बजट प्रावधान रखा है उससे 5 प्रतिशत लोगों के घरों में भी सोलर पैनल नहीं लग पाएंगे। सौर ऊर्जा सब्सिडी के लिए वर्ष 2025-26 में 60 हजार और 2026-27 में मात्र 70 हजार घरों में संयंत्र लगाने वालों को सब्सिडी देने का लक्ष्य रखा गया है अर्थात 2 साल में कुल 1 लाख 30, वर्तमान में प्रदेश में लगभग 80 लाख से ज्यादा परिवार है, इस रफ्तार से लाभ देने में 125 साल लगेंगे, वह अभी तक जब प्रदेश में परिवारों और घरों की संख्या स्थिर हो जाए। आमतौर पर जो थ्री फेस का कनेक्शन होता है उसमें न्यूनतम लोड 5 किलो वाट का होता है जिसके लिए सोलर पैनल लगवाने कम से कम 3 लाख 50 हजार रुपए लागत आएगी और केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा अधिकतम सब्सिडी 1 लाख 8 हजार मात्र है। एक किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल पर 30 हजार केंद्रीय और 15 हजार राज्य का, कुल 45 हजार, 2 किलोवाट के लिए 60 और 30 कुल 90 हजार, 3 किलोवाट के लिए अधिकतम 78 और 30 कुल 1 लाख 8 हजार, अर्थात 5 किलो वाट क्षमता के सोलर पैनल के लिए 3 लाख 50 हजार में से 2 लाख 42 हजार स्वयं हितग्राही को वहन करना होगा, बैंक फाइनेंस पर न्यूनतम 6 से 7 प्रतिशत ब्याज के साथ किस्त जो भुगतान योग्य होगा, वह वर्तमान में कुल बिजली बिल से कम से कम दो से तीन गुना आएगा।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इस महीने के बढ़कर आए बिजली बिल से आम जनता को लगे झटके से ध्यान भटकने के लिए मुफ्त बिजली का झांसा दिया जा रहा है। विगत 20 महीनों के भीतर चार-चार बार घरेलू बिजली की दर बढ़ाने और 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ की योजना को खत्म करने के बाद अब बढ़े हुए दर से आ रहे हैं बिजली के बिल के चलते जनता के आक्रोश से ध्यान भटकने के लिए सरकार सोलर पैनल सब्सिडी का फर्जी दावा कर रही है। जब यह सरकार मानती है कि कोयले से बनने वाली बिजली से प्रदूषण बढ़ रहा है फिर अडानी के खदानों के लिए परसा कोल सहित 5 नए कोल ब्लॉक के लिए हसदेव अरण्य के लाखों पेड़ क्यों कटवा रही है? जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य, अडानी के मुनाफे के लिए क्या शिथिल कर दिया गया है?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि नए उद्योग नीति के नाम पर बिजली उत्पादन बढ़ाने के दावे भी तथ्यहीन हैं। वर्षों से छत्तीसगढ़ सरप्लस पावर वाला स्टेट रहा है, लेकिन भाजपा की सरकार आने के बाद से ही पूरे प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है। ना किसानों को सिंचाई के लिए कृषि पंप चलने बिजली दे पा रही है, ना उद्योगों को पर्याप्त बिजली मिल रहा है और ना ही घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को। बिजली बिल हाफ योजना बंद करके सोलर पैनल से मुक्त बिजली का दवा केवल लफ्फाजी है, झूठ है, जुमला है।

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