March 13, 2026

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सरकार की लापरवाही के कारण बारिश में 30 लाख मीट्रिक टन धान भीग गया है…

सरकार की लापरवाही के कारण बारिश में 30 लाख मीट्रिक टन धान भीग गया है…

सरकार की लापरवाही से मिलिंग और परिवहन के अभाव में संग्रहण और उपार्जन केंद्रों में सड़ रहे धान।

हरियर एक्सप्रेस, रायपुर। सरकार की लापरवाही के कारण बारिश में 30 लाख मीट्रिक टन धान भीग गया है। मिलिंग और परिवहन के अभाव में संग्रहण और उपार्जन केंद्रों में सड़ रहे धान को भाजपा सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही का परिणाम करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पिछले खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान 27 जिलों में अभी तक पड़े हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय जो 72 घंटे के भीतर परिवहन की बाध्यता थी इस सरकार ने उस नियम को बदल दिया। दुर्भावना पूर्वक मिलिंग की दर घटा दी गई जिसके चलते लाखों मीट्रिक टन धान आज भी उपार्जन केंद्रों में सड़ रहे हैं। सरकार की लापरवाही और बदइंतजामी से सोसाइटी में धान भी खराब हो रहे हैं जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसे का नुकसान धान की बर्बादी में हो रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार ने प्रदेश की विष्णुदेव सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान से बना पूरा चावल नहीं खरीदा, जिसके चलते राज्य सरकार को किसानों से खरीदे गए धान के निस्तारण की समस्या उत्पन्न हो गई है। दलीय चाटुकारिता और मोदी-शाह के अधिनायक वाद के चलते राज्य की सरकार केंद्र पर भी नहीं बन पा रही है। बाजपट्टी प्रदेश सरकार ने किसानों से खरीदे अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचने का प्रयास भी किया। 3100 रू. प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया धान परिवहन और हैंडलिंग मिलाकर 3822 लागत मूल्य है जिसे शायद सरकार ने नीलामी का बेस रेट 1900 प्रति क्विंटल तय करके बेचने का प्रयास किया, उसके बावजूद अब तक पूरा धान नीलाम नहीं हो पाया है, और लाखों टन धान सोसाइटियों में सड़ रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारी किसान विरोधी है, छत्तीसगढ़ विरोधी है, सहकारिता विरोधी है, सोसाइटियों को नुकसान पहुंचा कर बर्बाद करने का षड्यंत्र रचा गया है। छत्तीसगढ़ की धरती में बने एफसीआई के गोदाम में छत्तीसगढ़ के किसानों के द्वारा ऊपजाये छत्तीसगढ़ के सोसाइटियों के द्वारा संग्रहित धान से बने चावल को रखने के लिए स्थान नहीं है। केंद्र की मोदी सरकार को छत्तीसगढ़ से कोयला चाहिए, आयरन चाहिए, टीन चाहिए, बक्साईट चाहिए लेकिन छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं से उपार्जित धान से निर्मित चावल के लिए केंद्रीय पूल में जगह नहीं है? डबल इंजन की सरकार में 35 लाख टन धान खुले बाजार में नीलाम करना पड़ रहा है, क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार ने दुर्भावना पूर्वक केंद्रीय पुल में चावल का कोटा नहीं बढ़ाया। सरकार की दुर्भावना के चलते जो संग्रहण केंद्रों में धान सड़ रहे हैं उसका नुकसान सीधे तौर पर सरकारी समिति को उठाना पड़ेगा जिसके चलते हजारों सहकारी समितिया आर्थिक तौर पर बर्बाद हो रही हैं। छत्तीसगढ़ के किसान भारतीय जनता पार्टी की दुर्भावना और छत्तीसगढ़ की अपेक्षा के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे।

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