आज है इबादत की रात यानी शब-ए-बरात, अपनों की मगफिरत के लिए होगी खास दुआएं…

Hariyar Express News
रायपुर। आज शब-ए-बरात पर जुमेरात को पुरखों की मगफिरत के लिए हजारों हाथ उठेंगे। ईशा से फज्र की नमाज़ तक मस्जिदों और घरों में इबादत होगी। मगरिब की नमाज़ के बाद दो दो रकात करके खास नफ़ील नमाज़ अदा की जाएगी बाद नमाज़ फातेहा उसके बाद कब्रिस्तानों में अकीदतमंदों के आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

शबे बरात की अहमियत पर जोर देते हुए शहर क़ाज़ी मौलाना मोहम्मद अली फारूकी साहब ने कहा कि यह रात अल्लाह की रहमत और बख्शिश की रात है। उन्होंने बताया कि पैगंबर ए आज़म हुजूर नबी ए करीम ने फरमाया कि जब शाबान की पंद्रहवीं रात आए तो उस रात को जागकर इबादत करो, अल्लाह से दुआ मांगो और अपने गुनाहों की तौबा करो। उन्हों ने आगे कहा कि इस मुबारक रात में अल्लाह अपने बंदों से मुखातिब होकर फरमाता है— “क्या है कोई जो तौबा करे, मैं उसकी तौबा कुबूल करूं? क्या है कोई रोज़ी मांगने वाला, मैं उसे रोज़ी अता करूं? क्या है कोई बख्शिश मांगने वाला, मैं उसे बख्श दूं?” यह सिलसिला सुबह फज्र तक जारी रहता है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि इस रात को ग़फलत में न गुज़ारे, बल्कि अल्लाह की इबादत करे, कुरान की तिलावत करे और अल्लाह से अपने तमाम मरहूमीन की मगफिरत की दुआ करे।
इस मुबारक रात की अहमियत बताते हुए मौलाना सिब्तैन रज़ा हाशमी (अधिवक्ता) ने कहा कि इस रात में इंसानों की तकदीर का फैसला होता है। जो इंसान दुनिया में आने वाला होता है या दुनिया से जाने वाला होता है, उसका नाम भी इसी रात लिखा जाता है। उन्होंने कहा कि 13 फरवरी की रात जागकर 14 फरवरी का रोज़ा रखने से बड़ा सवाब मिलेगा। उन्हों ने लोगों से अपील की है कि इस रात को इबादत में गुजारें और ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे। खासतौर पर नौजवानों को बाइक स्टंट करने से रोकें ताकि वे अपनी जान से खिलवाड़ न करें। उन्होंने कहा कि शबे बरात की रात तौबा, इबादत और अल्लाह की रहमत समेटने का बेहतरीन मौका है, इसे ज़ाया न करें।

अखबार हरियर एक्सप्रेस के संपादक नवेद खान ने बताया कि इस रात अपनों की कब्रों पर फातिहा पढ़ी जाएगी। शब-ए-बरात पर मुस्लिम इलाकों में खासी तैयारी की गई है। कब्रिस्तानों की साफ-सफाई का काम पूरा हो चुका है। वहीं मस्जिदों में रंगाई-पुताई की जा चुकी है। बुधवार को अकीदतमंद रात जाग कर खुदा की इबादत करेंगे। बड़े हो या बच्चे सभी इबादत में मशगूल रहने को तैयार हैं। इशा की नमाज़ से फज्र की नमाज़ तक बस इबादत ही इबादत होगी। दुनिया से विदा हो चुके अपनों की मगफिरत के लिए दुआ की जाएगी। इस मौके पर गरीबों को खाना भी खिलाया जाएगा। शब-ए-बरात की रात रमज़ान में शबे कद्र की रातों के बाद तमाम रातों से अफ़ज़ल है। इस रात में लोग अल्लाह ताला से इबादत के साथ अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।




